करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 125, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोरख की अवस्था 700 साल थी । छ: योगेश्वर धरती पर हुए, जिनमें शिवजी और गोरखनाथ का महत्व है । 'शिव गोरख सो पार ना पाए । और जीव की कौन चलाए ।' शिवजी प्रथम योगेश्वर हैं और अंतिम गोरख जी हैं। इसलिए इनके ध्यान सूत्र हमारे धर्म और योग में प्रचलित हैं । गोरख जी ने मणिपूरक योग द्वारा अस्थियों और माँस को एक कर दिया था। वज्र का शरीर हो गया था; कोई हथोड़ा मारे तो वापिस हो जाता था। शिवजी का भी वज्र शरीर है। गोरख जी ने 700 साल तक अपनी काया को रखा। रामानन्द जी भी 500 साल तक रहे । ..... तो साहिब की उम्र कोई 15 साल थी, गोरख जी ने व्यंग्य से पूछा- कबते भये बैरागी कबीर जी, कबते भये बैरागी । साहिब ने कहा— नाथ जी हम जबसे भये वैरागी, मेरी आदि अंत सुधि लागी । धुधूकार आदि को मेला, नहीं गुरु नहीं चेला । जबका तो हम योग उपासा, तबका फिरों अकेला । कहा—जब न गुरु था, न चेला था, तब का सन्यासी हूँ । अब सवाल उठा कि क्या इतनी अवस्था थी ! कह रहे हैं-
जो बूझे सो बावरा, क्या उमर हमारी ।
असंख्य युग परलय गई, तबके ब्रह्मचारी।।
हम तो सदा महबूब हैं, कोटि निरं जन हो गये, परलोक सोहं ब्रह्मचारी ।। सिधारी ।
दश कोटि ब्रह्मा भये, नौ कोटि कन्हैया ।
सात कोटि शंभू भये, मोरी एक पलैया।।
कोटिन नारद हो गये, मुहम्मद से चारी ।
देवतन की गिनती नहीं, क्या सृष्टि बिचारी ।।
नहीं बूढ़ा कहै कबीर सुन गोरख, यह उमर नहीं बालक, नहीं भाट भिखारी । हमारी । जो परम चेतन अवस्था में रहने वाला है, वो चाहे इस लोक में रहे, चाहे उस लोक में, नीचे नहीं आता है; उसका ज्ञान कम नहीं होता है, वो दूसरी अज्ञानमय अवस्थाओं को प्राप्त नहीं होता है । इसलिए कह रहे हैं कि करोड़ों