करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवहाँ चेतना खूब है । आनन्द भी खूब है । कुछ शब्द सुरति अभ्यास भी कह रहे हैं । अन्दर धुनें हैं, उनमें खो जाता है । कुछ इसे पराकाष्ठा कह रहे हैं, पर इससे तुरीयातीत से पार नहीं जा सकते हैं। सबका अपना वजूद है । धुनें खुद ख़त्म हो जाती हैं। ‘जाप मरे अजपा मरे, अनहद भी मर जाय । सुरति समानी शब्द में, उसको काल न खाय ।।' फिर यह कौन सा शब्द हुआ ! यानी धुनात्मक शब्द नहीं है, वर्णनात्मक शब्द भी नहीं है । साहिब कह रहे हैं— 'सो तो शब्द विदेह ।' आवाज़ रहित धुन है वो। क्योंकि - 'दो बिन होय न अधर अवाज़ा ।' आवाज़ दो के बिना नहीं होती और यहाँ द्वैत आ गया, वहाँ माया है । बंकनाल बड़ी निर्मल अवस्था है । आज भी देश में बहुत लोग यह चीज़ कर रहे हैं । मैंने कुछ लोगों से कहा कि अपनी पुस्तकें छपवानी हैं। मेरे लोगों ने कहा कि 7 लाख की मशीन है, आपको 6 लाख में मिल जायेगी। इतने में मेरे सैक्रेटरी ने कहा कि फलानी जगह भी इतने की मिल रही है, फिर अपने बंदे का क्या फायदा! तो उनसे बात हुई तो कहा कि 5.5 लाख में दे देंगे। मुझे शंका हुई। नीचे आ गये। मैंने जानकारी ली तो एक जगह 5 लाख की मिल रही थी। तो उन्होंने भी कहा कि ठीक है, पाँच में ही दे देना। मैंने तो भी नहीं ली तो आख़िर में 3 लाख तक आ गये। इतने में मेरा एक नामी आया, वो प्रेस में लगा था, उसे जानकारी थी, कहा कि वो नहीं लेना । वो तो आजकल कबाड़ी के भाव बिक रही है, आजकल कम्प्यूट्राइज़ड हलकी मशीने आई हैं, जिसे दो बंदे चला सकते हैं । .... वो 3 लाख वाला फिर आया, कहा कि आपने 3 लाख में भी नहीं ली। मैंने कहा कि तुम तो सात में दे रहे थे ..... वो फिर नहीं आया। आजकल ठगी बहुत है, इसलिए सावधान रहना । भक्ति क्षेत्र में तो पूछो ही मत। महात्मा को अपने कल्याण का पता नहीं है । मैं दिल्ली घूमने गया था। 30-40 साल पहले की बात है । सोचा, एक रेड़ियो ले लेते हैं । चाँदनी चौक पर एक ने 700 रुपये का बताया। मैंने कहा कि ज़्यादा है उसने कहा कि 650 दे दो। मैंने कहा- ज़्यादा लग रहा है । उसने कहा कि बोहनी का समय है, 500 दे दो। मैंने कहा कि तू 4 बजे बोनी कर रहा है । उसने कहा— मैं अभी आया हूँ । हमारी शिफटें होती हैं ।...तो मैंने कहा कि रेट कम कर । उसने कहा कि खुद तो कहो, कितना दोगे ! मुझे शंका