भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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कफ़ ज़मा हुआ है। यह क्या है कफ ? कभी दमा हो जाता है तो कफ़ अधिक हो जाती है। कभी सर्दी-गर्मी से भी कफ़ हो जाती है । कफ़ का ठिकाना कहाँ है ? जहाँ इड़ा-पिंगला का बिंदू है, वहीं पर यह कफ़ बन रही है। इसलिए वो बंद है। निरंजन ने कफ़ से वो घाट बंद करके रखा है। यह कैसे खुले ? इंसान की एक समय में एक नाड़ी खुलती है । कभी इड़ा तो कभी पिंगला । दो स्वर उस दशा में चलते हैं जब शून्य से कफ़ हट जाता है। इस कफ़ ने सुषुम्ना को बंद करके रखा हुआ है । अब यह खोलें कैसे ?

मुर्शिदे कामिल से मिल, सिदक औ सबूरी से तकी ।

वो तुझे देगा फहम, दिलबर पे जाने के लिए॥

हमारी आत्मा प्राणों में रमी है। इन प्राणों में प्रमुख चार प्राण हैं । हरेक के चार उपप्राण हैं । प्राण यानी वायु । ये प्राण शरीर की नौ नाड़ियों और उनसे 72 कोठों में रमे हैं। जो चल रहे हैं, वायु का खेल है; जो बोल रहे हैं, वो भी वायु का खेल है; जो सुन रहे हैं, वो भी वायु का खेल है; जो भी काम कर रहे हैं, वायु है। ये 10 वायुएँ शरीर के विभिन्न हिस्सों में रहकर अलग-अलग काम कर रही हैं । अपान, समान, उदान आदि 10 वायुएँ हैं । जिस तरह बिजली तार पर चलती है, इसी तरह यह आत्मा प्राणों में समाई है | ये 10 प्राण हैं। ये कहाँ हैं? अपान वायु गुदा स्थान पर है। पेट से ख़ारिज करता है। यह भोजन को पकाती है। बड़ी ज़रूरी है । कुछ भी शरीर में फ़िज़ूल नहीं है । मलद्वार से निकलती है। यह है - ही है । जैसे गाड़ी चलती है तो फ्यूल-निकास के लिए पाइप लगी है। तो यह वायु जहाँ पहुँचेगी, नुक़सान करेगी। अगर हृदय में पहुँची तो हार्ट-अटैक हो सकता है, अगर सिर में पहुँची तो डिस्टर्ब कर सकती है। फिर उदान वायु कलेजे में रहती है। तीसरी प्राण-वायु हृदय में रहती है। चौथी सर्वतनव्याम वायु जोड़ों में रहती है । धनंजय वायु भुजाओं में और छाती में रहती है। लकबा भी वायु - विकार है । और समान वायु शरीर को मोटा होने से बचाती है। नाग वायु कंठ में रहती है। यह नींद लाती है। उबासी लेते हैं तो कंठ सिकुड़ता है। यही हवा नींद लाती है। यह बिगड़ गयी तो नींद नहीं आयेगी। किरकिल वायु नाक के अग्रभाग में रहती है। यह ट्रैफिक पुलिस की तरह काम करती है, बाकी वायुओं को मिलने नहीं देती है । इस प्रकार से 10 वायुएँ शरीर में अलग-अलग काम कर रही हैं । आत्मा इनमें रमी है । यह स्वांस कहाँ से चल रही है ?

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