भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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स्वर है, वो इंगला नाड़ी तथा जो दायां स्वर है, वो पिंगला नाड़ी कहलाती है । इनके मध्य में सुषुम्ना नाड़ी है, जो बंद पड़ी है । यह कफ से बंद है। हमने कभी इसका प्रयोग नहीं किया, इसलिए यह बंद है। यह शीश से सवा हाथ ऊपर तक जाती है। वहीं 10वां द्वार है । लेकिन सुषुम्ना 10वां द्वार नहीं है। वो तो 10वें द्वार तक जाने का एक माध्यम है। कुछ महात्मा लोग, जिन्हें 10वें द्वार का पूरा ज्ञान नहीं होता, उसे शीश के किसी एक विशिष्ट स्थान पर अंकित बताते हैं; लेकिन ऐसा नहीं है। बिलकुल नहीं । यदि यह किसी एक स्थान पर अंकित होता तो डॉ० या वैज्ञानिक लोग कभी का बता चुके होते। बिल्कुल बता चुके होते। इसमें कोई संदेह नहीं है, क्योंकि उनके पास बड़े आला यंत्र तथा माइक्रोस्कोप हैं और डॉ० लोग आप्रेश्न के मामले में भी बड़ी तरक्की पर हैं । वे ज़रूर शीश वाले 10वें द्वार को अपने छोटे-छोटे यंत्रों से खोल चुके होते और मानव को पूरा ब्रह्माण्ड दिखा चुके होते। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ, क्योंकि यह 10वां द्वार किसी एक स्थान-विशेष पर अंकित नहीं है । इसका तो सृजन करना पड़ता है। खैर, छोड़ो, हम पहले 10वें द्वार का रहस्य देखते हैं। इसमें साधक प्रवेश कैसे करे ? यह कैसे खुले ?

इड़ा के घर पिंगला जाई, सुषुम्न नीर रहे ठहराई ॥

सुषुम्ना नाड़ी को खोलने के लिए वाणियों में बोला । सुरति के दण्ड से घेर मन पवन को । साहिब ने तो अत्यंत जनसाधारण की वाणी में कहा है। सुरति के सहारे पवन को ऊपर की ओर फेरो । पर जब मैं अन्य पंथों के लोगों से पूछता हूँ कि सुषुम्ना कैसे खुले तो कहते हैं कि यह नहीं बताना है । मैं कहता हूँ कि छुपाने वाली बात ही नहीं है । वो कहते हैं कि आगे का भेद नहीं देना है, गुरु जी ने मना किया है। यह तो वही बात हुई, जैसे किसी से पूछो कि पठानकोट जाने का रास्ता मालूम है ? कहे—हाँ । पूछो तो कहे कि सतवारी तक मेटाडोर से जाओ, आगे का देख लेना। तो इस तरह वो भी आगे चुप हो जाते हैं। बड़ी अटपटी बात लग रही है। तो यह कैसे खुले ? यह बंद पड़ी है। किससे पड़ी है बंद ? देखते हैं । शरीर के अन्दर बड़ी विविधता है । यहाँ रक्त भी है, मूत्र भी है, वीर्य भी है, मल का कोश भी है, पित्त का कोश भी है। इस तरह सुषुम्ना कफ़ से बंद पड़ी है। वहाँ