भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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पर असर पड़ता है । कभी अक्लमंद नहीं हो सकता है। नशे का असर सीधा दिमाग़ के सोचने की ताक़त पर पड़ता है । इससे कहीं ज़्यादा झूठ बोलने से पड़ता है। झूठ बोलना हमारी आत्मा, हमारे अंत: करण के लिए हानिकारक है । स्वाभाविक हमारा मस्तिष्क, हमारा हृदय सत्य बोलने वाला है । बच्चे सत्य बोलते हैं। झूठ इंसान दो कारणों से बोलता है - पहला तो अपने दोषों को छिपाने के लिए और दूसरा स्वार्थवश यानी अपने भले के लिए दूसरों का नुक़सान कर बैठते हैं । कभी देखते हैं कि माँ से कोई चीज़ घर की टूट गयी, तो बच्चे को कहती है कि पापा को नहीं बताना । वो बच्चा भी झूठ सीख जाता है, सोचता है कि इससे बचा जा सकता है, झूठ हमारी रक्षा कर सकता है। वो बचपन में ऐसा सीखता है । यानी झूठ उसे सिखाया जाता है । स्वभाव से वो झूठ बोलने वाला नहीं था । झूठ से कोशिकाएँ कमज़ोर होती जाती हैं, इसलिए उससे उम्मीद नहीं रखना। सत्य पर चलना बहुत बड़ा तप है । साहिब ने तो कहा-

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।

जाक हृदय साँच हैं, ताक हृदय आप।।

'सत्य समान धर्म नहीं आना ।' हमारे शास्त्र सत्य समान मान ही नहीं रहे हैं और कोई धर्म । कहीं भी रहने वाला हो, जो इस संस्कृति का पालन करने वाला है, वो हिंदू है । देखते हैं, सत्य के आठ अंग हैं- - - सत्य बोलना, सत्य चलना, सत्य सोचना आदि । कभी किसी माता - बहन को देख कुछ ग़लत सोचते हैं। अपनी के विषय में नहीं सोचने देते हैं दिमाग़ को । इसका मतलब, , आपकी सोच कहीं काबू में है, कहीं आप ढीले हो जाते हैं । इसलिए चिंतन सत्य हो । फिर दाना भी झूठा न हो। यह भी सत्य खाना । एक राजा और एक महात्मा बचपन के दोस्त थे । महात्मा का भी एक बेटा था और राजा का भी एक बेटा था । राजा मर गया । महात्मा का शरीर भी छूट गया। राजा का बेटा गद्दी पर बैठा। वो राजा बना। उधर महात्मा के बेटे ने भी शादी नहीं की; वो महात्मा बना । दोनों की दोस्ती थी । महात्मा को राजमहल में आने-जाने की पूरी छूट थी । एक दिन राजा का हीरा गुम हो गया। वो दुखी हो गया। बड़ा ढूँढ़ा । जब नहीं मिला तो रानी ने कहा कि महात्मा ने लिया होगा। वो बड़ा नाराज़ हुआ, कहा कि ऐसा नहीं कहना । वो