करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 158, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंचुप हो गयी। वो फिर-फिर ढूँढ़ता था । कीमती चीज़ गुम हो जाए तो परेशानी होती है । रानी ने कहा कि देखो, हमारा महल है, यहाँ तीसरा वो ही आता है, और कोई नहीं। मैंने चुराया नहीं । जो आपका है, मेरा है। कमरे में हीरा है नहीं तो महात्मा ने ही लिया होगा। वो अपनी बात पर ही अड़ रही थी । राजा कह रहा था कि उसने कभी चोरी नहीं की। इतने में महात्मा आ गया, कहा कि यह लो हीरा, कल मैं चुराकर ले गया था; अब मैं आपके महल में नहीं आऊँगा, क्योंकि मैं चोर हो गया । राजा भी ज्ञानी था, कहा कि नहीं, दोस्ती का इम्तिहान मत लो । महात्मा ने कहा कि मैं सच कह रहा हूँ । राजा ने कहा कि कल आपने रोटी कहाँ खाई थी? कहा कि सुनारे के यहाँ । राजा ने कहा कि वो ग़लत भोजन आपने खाया, इसलिए आपके दिल में ग़लत सोच आ गयी । आपने हीरा चुरा लिया। फिर जब सुबह खाना मलद्वार से बाहर हुआ तो आपका हृदय दुबारा शुद्ध हो गया और आप हीरा वापिस करने आ गये। यह दाने का खेल था; आप चोर नहीं हैं । तो इस तरह फिर सत्य संकल्प हो, सत्य व्यवहार हो, सत्य कर्म हो, सत्य संभाषण हो, सत्य सुनना हो । आहार आपका शुद्ध होगा तो बुद्धि शुद्ध होगी, बुद्धि शुद्ध होगी तो ज्ञान शुद्ध होगा, ज्ञान शुद्ध होगा तो ध्यान शुद्ध लगेगा और ध्यान शुद्ध लगेगा तो मोक्ष की प्राप्ति होगी । माँस नहीं खाना हिंदू धर्म सत्य और अहिंसा पर चल रहा है। यह धर्म कह रहा है हिंसा मत करो, किसी को मारो नहीं। इसलिए जो माँस खा रहा है, वो धर्म से नीचे आ गया। उसने धर्म तोड़ दिया। वो धार्मिक कैसे रहा ! नहीं रहा । साहिब कह रहे हैं-
माँसाहारी मानवा, प्रत्यक्ष राक्षस जान ।
ताकी संगत न करो, होय भक्ति में हानि ।।
लोग कह रहे हैं कि हम हिंदू हैं। पता है, मैं क्या कह रहा हूँ ! हम ही हिंदू हैं; क्योंकि सत्य और अहिंसा इसके दो सिद्धांत हैं और हम पूरे चल रहे हैं इसके सिद्धांतों पर। माँस खाने वाला तो मेरे विचार से हिंसक हो गया। वो हिंदू नहीं रहा।