भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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है कि यदि माँस खायेगा तो रोग आयेंगे।

जब मैंने उस लड़के को समझाया तो उसने कहा कि आज के बाद नहीं खाऊँगा; मुझे इसका पता नहीं था । मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ। मैं फौज में भी अपने हिसाब से रहा। जब माँ बनता था तो अपना अलग से बना लेता था। प्लेन में भी मैं कुछ नहीं खाता हूँ । कभी वो पूछते भी हैं कि आप कुछ नहीं खा रहे । तो मैं समझाता हूँ कि आप उन्हीं हाथों से माँस की प्लेट भी उठा रहे हैं, उन्हीं हाथों से जूठन भी उठा रहे हैं, पानी भी उसी हाथों से उठा रहे हैं ।

जैसा खाओ अन्न, वैसा होय मन ।

जैसा पीओ पानी, तैसी होय वाणी॥

एक जगह संतमत वाले की दुकान थी। मुझे कुछ सामान लेना था। उसने अपने गुरु का फोटो भी लगाया हुआ था । इतने में मेरी नज़र वहाँ अण्डों की ट्रे पर पड़ी। मैंने कहा कि रुको, यह क्या है ! आप तो फ़लाने महात्मा के भक्त हैं । वो कहा कि ग्राहक आता है, सामान लेता है, फिर कहता है कि एक दर्जन अण्डे डाल दो। अब यदि अण्डे नहीं हैं तो वो कहता है कि मैं जब सामान लेकर दूसरी दुकान पर अण्डे लेने जाता हूँ तो वो कहता है कि वहीं से ले, जहाँ से सामान लिया । इसलिए यदि अण्डे नहीं होंगे तो मैं आपसे सामान नहीं लूँगा। तो रखने पड़ते हैं महाराज । देखा न, उसने समझौता कर लिया। 8 आदमी माँसाहार में दोषी हैं । पहला तो पालने वाला । इसलिए कहता हूँ कि नहीं पालना । आपको मुर्गी, बकरी भी नहीं पालनी है । किसी पक्षी को कैद करके नहीं रखना है और माँस का व्यापार भी नहीं करना है, अण्डे भी दुकान पर नहीं रखने हैं । यदि ' 'आत्मवतन सर्वभूतेशू' की बात की तो यह काम नहीं करना है । फौज में भर्ती से पहले अण्डरवीयर में खड़ा किया जाता है, देखा जाता है कि घुटने तो नहीं मिल रहे। हाथ ऊपर करवाए जाते हैं, देखा जाता है कि कितना फिट है, कहीं पेट तो बाहर नहीं है । अब वहाँ दौड़ना है; फिटनेस चाहिए। घुटने मिल रहे हैं तो भागेगा क्या! गिर पड़ेगा । इस तरह भक्ति में माँसाहार की जगह नहीं है । आज आदमी बेरोकटोक भक्ति करना चाहता है । जिस भक्ति में सिद्धांत नहीं है, वो भक्ति, भक्ति है ही नहीं ।