करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंखेलना हो तो खेलिये, पक्का होकर खेल ।
कच्ची सरसों पेर के, खड़ी भया न तेल ॥
नशा न करना सबसे ख़तरनाक नशा शराब का मानता हूँ। यह आदमी को जानवर से भी नीचे पहुँचा देती है। शराबी से कभी भी अच्छे काम की उम्मीद नहीं रखना। कभी-न-कभी उसका दिमाग़ ख़राब होगा ही । शराब का नशा लगता है कि सुबह उतर गया; पर वास्तव में वो नहीं उतरता है इतनी जल्दी। एक आदमी रोज़ दारू पीता हो तो तीन दिन न पिए तो उसे चक्कर आने लगेंगे । यदि वो 21 दिन तक शराब न पिए तो समझो क उसका 50 प्रतिशत नशा उतर गया। यानी 50 प्रतिशत अभी भी रहा । यदि 6 महीने तक नहीं पिया तो समझो कि 25 प्रतिशत रह गया । नशा है लेकिन । ढाई साल तक नहीं पी शराब तो समझना कि 12.50 प्रतिशत रह गया है अब । 7 साल बाद गौण हो जाता है । पर 14 साल तक नशे का अंश रहता है। ऐसे ही नहीं जाता है शराब का नशा । एक दिन मैं अंबाला से आ रहा था तो रोड़ किनारे गोबर का ढेर लगाया था किसी ने। बहुत बड़ा ढेर था। नेश्नल हाईवे तक टच कर रहा था वो। एक बंदा उसपर उलटा सोया था। शराब पीने वालों की हालत ऐसी होती है कि स्टाइल भी बड़ा अजीब हो जाता है । मैंने गाड़ी रोकी, सोचा कि किसी का बेटा होगा, किसी का भाई होगा । वो बिलकुल रोड़ पर ही था। मैंने कहा- उठो ! ग़लत सोए हो। वो कहा कि नहीं, आप जाओ, मैं ठीक हूँ। वो नशे में था। मैंने ड्राइवर के साथ उसे उठाया और कुछ दूर लिटा दिया। मानुष से पशुआ करे, द्रव्य गाँठ का देही॥ अवगुण कहूँ शराब का ज्ञानवंत सुन लेहिं । शराब के विषय में एक रूसी कहावत है कि एक किसान था । वह बड़े शांत स्वभाव का था । उसे कभी किसी पर गुस्सा नहीं आता था। एक राजा ने सोचा कि इसे गुस्सा दिलवाते हैं। उसने एक शैतान को यह काम सौंप दिया।