भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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एक दिन किसान अपने खेत में हल चला रहा था । शैतान ने आकर उसकी रोटी कुत्तों को दे दी । लेकिन यह क्या! किसान को तो गुस्सा नहीं आया । वह शांत ही रहा । शैतान ने वापिस आकर राजा को सारी बात बता दी। राजा ने उसे पुनः वापिस किया। अबकी बार शैतान नौकर बनकर आया; उसके यहाँ नौकर हो गया; जान-बूझकर आड़े- टेढ़े काम करने लगा, जिससे किसान गुस्सा हो जाए, पर किसान तो जैसे शांति का देवता ही था; उसने गुस्सा नहीं किया। ....... जमींदार के बेटे की शादी तय हुई। शैतान ने एक शराब तैयार की; उसमें चार जानवरों का खून मिलाया । फिर उसने जमींदार साहब को सब मेहमानों को शराब पिलाने की सलाह दी । भोज हुआ; सबने शराब पी। किसान ने भी पी। दो-चार व्यक्ति नशे में आकर एक-दूसरे को गालियाँ देने लगे; मारपीट शुरू हो गयी। किसान बेचारा सबको समझाता रहा, पर वे नहीं माने। अब किसान पर शराब का असर शुरू हो गया; उसे गुस्सा आ गया; लाठी उठाकर सब पर बरसाने लगा । इतने में शैतान गायब हो गया । सब हैरान रह गये। अब शैतान राजा के पास आया; अपनी सफलता का समाचार दिया । राजा ने उसे शाबाशी देते हुए उसकी सफलता का रहस्य पूछा। शैतान ने बताया कि उसने एक शराब बनायी; उसमें लोमड़ी, कुत्ते, शेर और सुअर का खून मिलाया । इसी शराब के कमाल से शांति के देवता - समान किसान को भी गुस्सा आ गया। यह थी - शराब की कहानी । प्रत्येक शराब पीने वाला व्यक्ति ऐसा बन ही जाता है। पहले तो लोमड़ी की तरह स्यानी - स्यानी बातें करता हैं, क्योंकि तब उसमें लोमड़ी का खून असर कर रहा होता है । फिर थोड़ी देर में कुत्ते का खून असर करना शुरू हो जाता है; इसलिए ज़ोर-ज़ोर से भौंकना - चिल्लाना शुरू कर देता है । फिर शेर की तरह बनकर मारपीट शुरू कर देता है और अंत में सुअर की तरह बेहोश होकर किसी गंदी नाली में गिर पड़ता है। प्रत्येक शराब में अल्कोहल पाया जाता है, जो हल्का ज़हर है । यही नशा पैदा करता है। जिसमें विष अधिक होता है, वही शराब अच्छी मानी जाती है। अच्छा, लोग शराब क्यों पी रहे हैं ? क्योंकि शुरू-शुरू में इसे पीने से