करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 163, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंदिमाग़ में कँपकँपी, एक गुदगुदी - सी होती है, तो शराबी सोचता है कि मज़ा आ रहा है। पर उसे नहीं पता है कि यह मज़ा धीरे-धीरे उसे विनाश की ओर ले जा रहा है। शराब दिमाग़ ख़राब कर देती है । जो भी शराब पीने वाला है, उससे हमें कभी अच्छे काम की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि उसका दिमाग़ कभी भी ख़राब हो सकता है; वो मूर्ख के समान ही होता है। उसका दिमाग़ कभी भी एक नेक इंसान का दिमाग़ नहीं रह सकता है। अधिकतर रोग भी शराब पीने वालों को सताते हैं । आर्थिक हालत भी ख़राब हो जाती है। एक तो इतना मँहगी शराब और फिर जब दिमाग़ ख़राब होगा तो कहीं पत्नी की बाजू मरोड़ेगा, कहीं बच्चे का हाथ तोड़ेगा । उनके ईलाज के लिए जो पैसा लगेगा, वो अलग। साहिब ने कितना सुन्दर कहा है- अवगुण कहूँ शराब का ज्ञानवंत सुन लेहिं ।
मानुष से पशुआ करे, द्रव्य गाँठ का देहि ॥
तो फिर कुछ चीज़ों की तोड़-फोड़ करेगा, वो नुक़सान अलग। भाइयो, आपकी शराब छुड़ाकर अपको अमीर बनाना है । नाम की दौलत तो मिलेगी ही, पर सांसारिक दृष्टि से भी आप अमीर हो जायेंगे । किसी भी प्रकार का नशा ठीक नहीं। यह शैतानी काम है। कुरान शरीफ में लिखा है कि आदमी को नशे में रखकर उससे बुरे काम करवाकर शैतान उसे जहन्नुम में ले जाना चाहता है।
भाँग तमाकू, धूतरा, जन कबीर जे खाहिं ।
जोग यज्ञ जप तप किये, सबै रसातल जाहिं ।।
तो इस तरह सिगरेट भी ठीक नहीं है । पर मैंने यह मना नहीं किया । है तो यह भी ख़तरनाक, पर इतना नहीं, इसलिए थोड़ी छूट दी । यदि हो सके तो इससे भी बचना। नशा आपको अमली बना देगा और फिर आप ध्यान -भजन में भी ठीक से नहीं बैठ पायेंगे । चोरी न करना एक आदमी चोर था। वो मुझे बड़ा प्यार करता था । था भी बड़ा धर्मात्मा और परमार्थी। वो चोर ग़रीबों की मदद भी करता था। किसी दुखी को देख दुखी हो जाता था। 20 साल पहले की बात है; उसने मुझे 100 रूपये का