भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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लेकर जाओ और उसे पानी पिलाओ। तो मैंने उसकी पुकार सुनी। मैंने उसकी भाषा समझी। चोराचौकी में सत्संग कर रहा था तो कौवे आकर पेड़ पर बैठे । वे चिल्लाए जा रहे थे। कोई नहीं उड़ाया उनको । मैंने सुना, वो बाकियों को बुला रहे थे कि आओ, यहाँ बहुत कुछ बना है खाने को । मैंने हारकर एक को कहा कि उड़ाओ; पर पहले इसलिए नहीं कह रहा था कि सोचा यह खुद उड़ाए तो ठीक है, सत्संग में बाधा न पड़े। हमारी एक गाय है; बड़ी चालाक है । उसके साथ में दो और गाएँ बँधी होती हैं। जब तीनों को चारा डालता हूँ तो वो क्या करती है कि अपने सामने पड़ा हुआ नहीं उठाती है। पहले आजू-बाजू का खाती है, जो दूसरी गायों को हिस्सा है, क्योंकि उसे पता है कि यह सामने वाला तो मेरा ही है । वो खाती भी बड़ी स्पीड में है । एक दिन एक गाय छूट गयी और जहाँ सुबह का चारा पड़ा था, वहाँ पहुँचकर खाने लगी। दूसरी गाय ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। वो बुला रही थी । जो देखभाल करने वाला था, वो गया तो देखा कि एक गाय खुली है। यानी वो सोच रही थी कि मेरा हिस्सा भी है इसमें और यह सब खा रही है। इसलिए किसी से नाइंसाफी नहीं करना । गोस्वामी जी कह रहे हैं—

हित अनहित पशु पक्षिन जाना ॥

मुझे भैंसे बुलाती हैं । कभी गर्मी लगती है तो कहती हैं कि पंखा चलाओ, कभी कहती हैं कि आज बड़ी देर कर दी खिलाने में, जल्दी आओ, भूख लगी है। यानी एक मूल सुरति सबमें है। तभी तो शास्त्रों में कहा गया— 'आत्मवतन सर्वभूतेशू । ' एक नन्हा-सा मच्छर भी तो देखो न ! जब आप हमला करने जाते हैं तो झट से उड़ जाता है। वो जान जाता है कि हमला हुआ है। यानी सुरक्षा की भावना भी तो सबमें एक जैसी है । इसलिए यह धर्म कह रहा है कि किसी भी जीव को परेशान नहीं करना है । क्योंकि वो कर्म का फल भोग रहा है । आत्मा जिस भी शरीर में जा रही है, वहीं अपने बाल-बच्चे भी बना रही है, सुख - दुख का अनुभव भी कर रही है। इसकी आह बड़ी जबरदस्त होती है। इसलिए—

मत सता किसी को जालिम, मत किसी की आह ले ।।