करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 171, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंजब भी आप कहीं भी जाते हैं, यह मूल सुरति होती है। यह कहाँ से आई? यही किरणें परम-पुरुष ने अपने से अलग कीं । इसी की मुक्ति चाहिए । इसने अपने को शरीर मान लिया है। यह दुखी है । इसे मत दुखाना । यह प्रभु का रूप है। इसे दुखाया तो समझो कि प्रभु को दुखाया। आप विश्वास करना। आत्मा में हरेक भाषा बोलने की ताक़त भी है । सच बताता हूँ, मैंने संसार के समस्त प्राणियों से बात की है । मैं मकान बना रहा था । एक कमरे का फर्श नहीं डाला। पैसे का जुगाड़ नहीं हुआ। दो साल हो गये । माँ ने कहा कि वहाँ भी फर्श डालो, उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं । एक दिन मैं जब पत्थर डालने लगा तो बहुत से चींटे बाहर निकल कर आए । लाल-लाल रंग के अजीब चींटे थे। उन्होंने कहा कि क्यों छेड़ रहे हो ? उन्होंने हमला किया, कहा कि हम यहाँ रहते हैं, हमारे बच्चे भी हैं। मैंने कहा कि बाहर आ जाओ। वो नहीं आए। मैंने अगले दिन फिर कहा कि एक दिन की मौहलत और देता हूँ। वो अगले दिन भी नहीं गये। मैंने पत्थर डालने शुरू किये। एक मिस्त्री आया, कहा कि डालता हूँ। मैंने कहा कि यह मेरा निजी काम है, आश्रम का नहीं है, मैं खुद करूँगा । मैंने बड़ी स्पीड में पत्थर बिखेर दिये। 50-60 चींटे आए, हमला किया, कहा हम सब अंदर हैं। मैंने चींटों को कहा कि तुम्हें समय दिया था, पर तुम नहीं निकले, अब मुझे फर्श तो डालना है। मैंने डाल दिया। 48 घण्डे बाद मैंने फर्श डाल दिया। 12 बजे रात को सभी चींटे मेरे सामने आए, कहा कि हमारे बच्चे हैं; वहाँ फर्श तोड़ो। सच मानना, वो इंसान की भाषा में बोल रहे थे। मैंने कहा कि अब नहीं तोडूंगा; बड़ी मेहनत से डाला है; तुम जमीन खोदकर कहीं ओर से अपना रास्ता बना लो । जब मैं कहूँगा तो आपको आश्चर्य होगा। किसी देवस्थान पर जाता हूँ तो बात करता हूँ । गंगा जी के पास गया तो गंगा जी से बात की है, शिवजी के स्थान पर गया तो शिवजी से बात की है । जहाँ स्थान है, वे हैं । पर आप ऐसे ही आ जाते हैं। मैं जे. सी. ओ बना तो पार्टी देनी थी। मुझे कहा कि पार्टी दो । उनकी पार्टी क्या होती है— शराब, मुर्गे । मैंने कहा कि कितने पैसे लगेंगे ? कहा—5 हज़ार। मैंने कहा कि मैं 7 हज़ार दूँगा, पर मुर्गे नहीं खिलाऊँगा । काजू-बादाम,