करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 173, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंके कारण इंसान निरीह जीवों की जान लेता है । जिस मृत्यु-लोक में आप बैठे हैं, केवल यहीं कर्म है, और कहीं नहीं है । इसलिए किसी का दिल मत दुखाओ। जब भी लगे कि दिल दुखा तो साँत्वना दो। यह मत सोचना कि क्या बिगाड़ेगा ।
बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो, और भी गिरजाघर हैं ।
लेकिन किसी का दिल मत तोड़ो, खास खुदा का घर है ॥
आपको पेड़ों की बात बताता हूँ; उनमें भी मूल सुरति है । वे भी बात करते हैं। राँजड़ी में एक पेड़ है । एक दिन उसकी एक डाल बड़ी ज़ोर से हिली। मैंने सोचा कि कोई बड़ा पक्षी आकर बैठा है । ऊपर देखा तो इंसान की गर्दन आई, कहा—नमस्कार। हिंदू धर्म में जो पेड़-पौधों की पूजा की जाती है, इसमें गहराई है । तो कहा कि आपकी बड़ी फसल है, कोई कमी नहीं है, पर मैं और मेरा छोटा भाई है, हम दोनों बीमार पड़ गये हैं। सभी आपकी सेवा करते हैं; हम भी करना चाहते हैं । मैंने कहा - करो। कहा कि आप दो बार दवा छिड़क देना— - एक दिसंबर में और एक मार्च में। मैंने सुबह माली को बुलाया और कहा कि इसपर दवा छिड़क देना । उसे नहीं बताया कि पेड़ ने कहा है । बहुत बूर लगे । फल लगे; वो गिरने लगे। मैंने पूछा कि भाई हमने दवा छिड़की तो भी फल नहीं लगे ! उसने कहा कि दवा एक बार छिड़की है। वो माली एक बार छिड़ककर भूल गया था। वो चेतन पेड़ है। उसने पहला फल गिराया, जब मैं ब्रश कर रहा था। गजब का फल था; कहा- खाना । मैंने फल तुरना को दिया, कहा कि इसे रखो, भोजन के साथ देना । जब मैंने फल खाया तो वैसे ही उसने कहा कि आज मैं धन्य हो गया; मैं यही चाहता था । जो जीव महापुरुषों के चरणों के नीचे मर जाते हैं, वो मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं। जिस पेड़ का फल खाया, वो मुक्त हो जायेगा । जिसके घर में भोजन किया, समझो उसने पूरे ब्रह्माण्ड को भोजन खिला दिया । 100 योगी को भोजन खिलाना एक साधु को भोजन खिलाने के बराबर है । साधु वो, जो काम, क्रोध को छोड़ा है, वो नहीं जो साधु का चोला पहना है । और पूरे ब्रह्माण्ड को भोजन खिलाना और एक संत को भोजन खिलाना एक समान है । तो पेड़ कितना चेतन था ! वो फल तब गिराता है, जब मैं हूँ या वो लड़की तुरना, क्योंकि वो जानता है कि यह लड़की नहीं खाती है। बाकी खा