करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलेते हैं। वो फल भी छिपाकर रखता है । ढूँढ़ते रहो, नहीं मिलेगा। इसलिए भाई, सबमें एक आत्मा को देखो; किसी को मत मारो ।
जीव न मारो बापुरा, सबके एकै प्राण ।
हत्या कबहुँ न छूटती कोटि सुनो पुराण ॥
हम कहते भी हैं— ' धर्मराय जब लेखा माँगे, क्या मुख लेकर जायेगा॥' वो इसी मूल सुरति से लेखा लेता है । हरेक जीव का हिसाब होगा । वो कभी भी अन्याय नहीं करता है । उसकी सभा में चित्रगुप्त है; वो सज़ा सुनाता है कि इस पाप के लिए क्या सजा होनी चाहिए। जब उससे मामला नहीं सुलझता, कोई पेचीदा मामला आ जाता है तो स्वर्ग से विद्वानों की टीम को बुलाता है । वेदव्यास और अन्य मिलकर विचार करते हैं और सज़ा सुनाते हैं। मूल सुरति है । जब भी ब्रह्माण्ड में जाते हैं तो मूल सुरति होती है। ये बातें कहने में नहीं आती हैं। मान लो कि किसी ने गुप्ता जी को कुछ कहा । गुप्ता जी उसे चार चाँटे मारें तो कोई कहे कि ठीक ही किया, पर अंदर से कॉन्शियस कहेगा कि ग़लत किया । हम सबके अंदर एक चीज़ बैठी है । कुछ भी ग़लत नहीं करो। यदि आपके पास आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं तो उनका भी ग़लत इस्तेमाल मत करो । कुछ के पास त्राटक विद्या होती है तो दूसरे को कष्ट देते हैं। उससे आपको बाँध दिया जाएगा तो हिल भी नहीं पायेंगे। सुरति से त्राटक होता है । स्वाँस रोककर किसी का ध्यान किया तो उधर उसका दम भी घुटने लगेगा। आप रोकर किसी का ध्यान करें तो उधर वो भी रोएगा। किसी को भगाना चाहें तो वो भी हो जायेगा, किसी को बुलाना चाहें तो वो भी हो जायेगा । कभी कहते हैं कि किसी ने कुछ कर दिया है। बिलकुल ठीक बात है । यह काला इल्म कहलाता है। इससे किसी को कष्ट ही दिया जाता है । फिर सिद्धियाँ भी हैं। उनसे किसी का कल्याण भी किया जा सकता है । महापुरुष परोक्ष और अपरोक्ष रूप से किसी को भी कष्ट नहीं देते हैं । एक बड़ा आदमी मेरे पास आया, कहा कि मैं एक डॉ० लड़की से प्यार करता था। पहले वो भी मेरे साथ करती थी, पर अब नहीं करती है । मैं उससे शादी करना चाहता हूँ । आप कुछ मदद करिए। मैंने सोचा कि किसी को