करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभेजकर बात करने के लिए कह रहा है। मैंने पूछा कि कैसी मदद? कहा कि सम्मोहन करो। मैंने कहा कि यह काम नहीं करूँगा मैं । मारण, वशीकरण आदि से किसी को भी तंग किया जा सकता है । किसी को भी उचाट किया जा सकता है । तब उसका दिल ही नहीं लगेगा । वशीकरण कर देंगे तो दौड़ा चला आयेगा। किसी गाँव में एक उचाट विद्या जानने वाला महात्मा था। वो किसी को भी रात को अपने आश्रम में नहीं टिकने देता था । वो कहता नहीं था कि चले जाओ, बस, उचाटन कर देता था। सूर्य डूबने के साथ ही बंदा चल पड़ता था; रुक ही नहीं पाता था। एक बार मेरे गुरुदेव भी उसके आश्रम में गये । उसने भोजन खिलाया; उचाट किया। पर मेरे गुरुदेव ने पकड़ लिया, कहा कि मुझे यहाँ रात को रुकना है, आप चाहे जितना मरजी उचाटन कर लो, क्योंकि मैं सन्यासी हूँ; मुझे गृहस्थ के घर में तो रुकना नहीं है; आज तो यहाँ रुकना ही है; सुबह मैं चला जाऊँगा; तब तू रोकेगा तो भी नहीं टिकूँगा । जब गुरुदेव सुबह होने पर आश्रम से बाहर निकले तो आगे पूरा गाँव हार लिये खड़ा था, कहने लगे कि आप 40 साल में पहले हैं जो यहाँ रुके। तो यह बड़ा ख़तरनाक भी होता है उच्चाटन । प्रभु अपनी शक्तियाँ बड़ी सोच-विचारकर देता है। बंदूक उसे मिलती है, जिसका रिकार्ड अच्छा है, जो अपराधी न हो । प्रभु भी रिकार्ड देखता है। कहीं शक्तियाँ मिलने के बाद इसका गलत इस्तेमाल तो नहीं कर लेगा; कहीं विनाश तो नहीं करेगा। देखता है कि सहनशील है तो फिर देता है । जब वो देना शुरू होता है तो देता जाता है। वो साहिब जानता है कि निर्मल हो गये तो देता जाता है । 'भली बुरी सबकी सुन लीजे, कर गुजरान गरीबी में ॥' तो हरेक के पास मूल सुरति है । आध्यात्मिक शक्तियों का ग़लत प्रयोग भी अपराध है । मन, वचन, कर्म से किसी को पीड़ा न देना। दयावान बनना। आपमें ताक़तें आती जायेंगी । बस, आप नियमों का पालन दृढ़ता से करना ।