करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 177, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंचढ़े तो अमृत पावसी, गिरे तो चकनाचूर ।।
जो भी चीज़ें मना की, वो भूलकर भी नहीं करना । जिंदगी-भर के लिए मुसीबत हो जायेगी। बचना । साहिब ने कहा—
गुरु बचना तोपे, ता ऊपर यमराजा कोपे ॥
कुछ पागल बनकर घूम रहे हैं । वो ऐसे ही नहीं हैं। वो शब्द तोड़ने वाले हैं। साहिब कह रहे हैं कि उसपर तो निरंजन भी गुस्सा करता है । कहता है कि आ बच्चे, तेरी खिचड़ी निकालता हूँ । इसलिए गुरु - आज्ञा में रहना । मेरे ख्याल से आपकी ग़लती माफ नहीं होनी चाहिए। आपको इशारे अन्दर से मिल रहे हैं। फिर ग़लती क्यों ? दुनिया के लोग तो अज्ञान में हैं। उनकी ग़लती फिर भी माफ की जा सकती है। जैसे किसी अंधे का पाँव कीचड़ में पड़े तो बुरा नहीं मानते हैं, पर किसी आँख वाले का पड़े तो माफ़ करोगे क्या ? कहोगे न कि देखा क्यों नहीं! ऐसे ही नाम के बाद ग़लती करोगे तो सज़ा मिलनी ही चाहिए। हाँ, इतना ज़रूर हो सकता है कि यदि किसी को 50 चाँटे पड़ने हों तो एक साथ नहीं पड़ेंगे। ऐसा होगा कि कभी एक, कभी अचानक दो पड़ जायेंगे। इतनी कंसेशन, इतनी छूट हो जायेगी। पर गिनकर 50 पड़ेंगे ही। यह तय है । यह सज़ा भी कल्याण के लिए है। अब सज़ा मिलेगी तो कैसी फराटी होगी, बताता हूँ । आपने एक झूला देखा होगा। जब वो ऊपर जाता है तो बंदा भी उलटा हो जाता है यानी सिर नीचे और पाँव ऊपर। उसमें बंदे का पेशाब भी बाहर निकल आता है | बड़ा ख़तरनाक है वो झूला । कोई कितना भी चिल्लाए कि बंद करो, बंद करो, पर झूले वालों को वो चक्कर पूरे करने ही हैं, चाहे किसी का पेशाब क्यों न निकल जाए। जब फराटी होती है तो ऐसा ही होता है । साहिब तब तक बंद नहीं करता है। जितनी फराटी देनी है, देकर रहेगा । फिर तौबा करोगे आगे से । मैंने जीवन में दो को बहुत बड़ी सज़ा दी है। उनमें भी एक को तो पक्का। मैंने अपने से उसकी सुरति की तार काट दी यानी वो कभी मेरा ध्यान नहीं कर सकता है, आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त नहीं कर सकता है । यही सज़ा साहिब ने, परम-पुरुष ने निरंजन को दी थी, जब उसने अनेक कुकर्म किये थे। कहा—जा, अब तू मेरा ध्यान नहीं कर पायेगा । यदि वो ध्यान कर सकता होता तो उसने आपकी खिचड़ी निकाल देनी थी, क्योंकि ध्यान से बड़ी ताक़त