करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 178, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंमिलती है। इसलिए परम - पुरुष ने उसे अपने से डिस्कनेक्ट कर दिया । तो जिस आदमी को मैंने यह सज़ा दी, उसने बहुत बड़ी ग़लती की थी। मैंने कहा- जाओ, अब तुम मेरे पास कभी भी नहीं आना । उसने पूछा- कभी रास्ते में मिल जाओ तो दर्शन कर सकता हूँ? मैंने कहा- नहीं । उसने जाते समय बड़ी प्यारी बात कही, बोला—मैं जानता हूँ कि इस ग़लती के लिए आप मुझे क्षमा नहीं करेंगे। यदि आपने मुझे क्षमा कर दिया तो संगत मचलेगी । मत करो माफ़ । पर एक बात याद रखना, यदि मेरी आत्मा नरक में भी डुबकियाँ लगा रही होगी तो भी यह आत्मा आप ही को पुकारेगी। मैं अब किसी और की भक्ति नहीं कर पाऊँगा। मेरे हृदय में उस समय भी उसके लिए करुणा थी, पर मैंने उसे यह सजा दे दी। गलती करनी ही क्यों ? प्रेम को बनाए रखो न ! रहिमन दागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
टूटे ते फिर न जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय ।।
आपके पास चेतन करने के लिए इतनी बड़ी शक्ति दी है, फिर गलती क्यों? बड़े बड़े विद्वानों को भी पाप पुण्य का इतना ज्ञान नहीं होगा, जितना आपको है। इसलिए भाइयो, आपकी भूल की माफ़ी नहीं है। " 'सत्य वचन' " 66 'हो नशा विहीना, ' " " शाकाहारी " " चरित्र न हीना " । " 'हक कमाई' " "चोरी नहिं जाना,' "
"जुआ" समझत पाप समाना ॥