भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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ध्यान किसका करें

कभी-कभी कुछ लोग कहते हैं कि भक्ति करेंगे तो उससे आत्मा को शक्ति मिलेगी। नहीं ! नहीं! ऐसी बात नहीं है । यदि आत्मा को किसी चीज़ की जरूरत है तो फिर वो चीज़ आत्मा से बड़ी हो जायेगी । यदि भक्ति से आत्मा को ताक़त मिलेगी तो भक्ति आत्मा से बड़ी हो जायेगी। पर नहीं, आत्मा से बड़ी कोई चीज़ नहीं है । यह तो ईश्वर की अंश है । इसे किसी बाहरी पदार्थ की ज़रूरत नहीं है । फिर यदि ऐसा है तो भक्ति क्यों करनी है ? ध्यान क्यों करना है? आओ, इस ओर चलते हैं । भक्ति से, ध्यान से आत्मा को शक्ति नहीं मिलेगी, पर आत्मा के ऊपर जो मन-माया का कीचड़ लगा हुआ है, वो धुलता जायेगा और आत्मा अपने को अनुभव करने लग जायेगी । हमें विचार करना होगा कि हम ध्यान किसका करें। ध्यान एक विशिष्ट चीज़ है। हम जिसका भी ध्यान करते हैं, उसकी वृत्तियाँ, उसके गुण हमारे भीतर आ जाते हैं । जैसे बीज में प्रस्फुटनशीलता का गुण है, उसका प्रस्फुटन होता है; पर उसे विकसित करने के लिए पलावन और सींचने की ज़रूरत होती है। लेकिन यदि किसी बंद कमरे में बीज बो दिया जाए तो वो प्रस्फुटित नहीं हो पाता, चाहे कितनी भी सिंचाई कर लो, क्योंकि उसे सूर्य का प्रकाश नहीं मिल पाता है । इस सुरति में सब कुछ है । बस, इसे अंकुरित करने की ज़रूरत है । इस पर मन-माया का आवरण पड़ा हुआ है, जिससे यह सुरति कुंद हो गयी है। यह अंकुरित होती है गुरु की सुरति से। इसी कारण शास्त्रों में भी गुरु का ही ध्यान करने को कहा गया है । कहीं पर भी परमात्मा का ध्यान करने को नहीं कहा गया । हम उसी का ध्यान कर सकते हैं, जिसे हमने कभी देखा हो । जिसे हमने देखा नहीं, उसका ध्यान नहीं कर पायेंगे । इसलिए परमात्मा का ध्यान