भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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यदि ऐसा संभव नहीं हो सके तो उसका विकल्प है - ध्यान ।

यह ध्यान बड़ी ही लाजवाब चीज़ है । हमारा ध्यान जितनी देर जिसमें मा हुआ है, हम भी उतनी देर वैसे ही हो जाते हैं । यदि हमारा ध्यान थोड़ी देर के लिए क्रोध की ओर हो जायेगा तो हम भी उतनी देर के लिए क्रोधमय हो जायेंगे। यदि यह ध्यान आनन्द की तरफ हो जायेगा तो हम भी आनन्दमय हो जायेंगे। इसी तरह सद्गुरु का लगातार ध्यान करने से हम भी उनकी तरह हो जायेंगे। जब हम सद्गुरु का ध्यान करते हैं तो भी हमें परमात्मा की अद्भुत ताक़त मिलती है, इसलिए हमें सब संशय छोड़कर केवल गुरु का ही ध्यान करना चाहिए। धर्मदास जी ने साहिब से पूछा कि परम-तत्व की प्राप्ति कैसे करें ? साहिब ने एक ही शब्द में सारा रहस्य कह दिया, कहा- गुरु में सुरति लगा देना, बाकी काम वो खुद कर लेगा । सकल पसारा मेट कर, गुरु में देय समाय ।

कहैं कबीर धर्मदास से, अगम पंथ लखाय ।।

मैं सिरजौं मैं मारऊँ, मैं जारौं मैं खाऊँ ।

जल थल नभ में रमि रहा, मोर निरंजन नाऊँ ।।

मैं ही अमरधाम परमपुरुष का पंचम शब्द पुत्र हूँ । मैं ही विमूढ़ वरदान लेकर, परमपुरुष से शापित हूँ । मैं ही आद्यशक्ति-सह-हँसों को ले कालपुरुष कहाता हूँ ।

मैं ही निरंजन अमरधाम के मानसरोवर से निष्कासित हूँ।

मैं 'मन' ही आत्मरूप तीन लोक में वासित हूँ ।।