भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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ध्यान करते समय.......

आत्मा के पास एक वांछक ज्ञान है, एक परा ज्ञान है। एक तो क्रियाओं को देखकर, मानव समाज को देखकर सीख लेते हैं, वो बुद्धि से समझा जाता है । पर एक, जो स्वतः ही हमारे अंदर ज्ञान है, वो सही ज्ञान है । कभी-कभी आपके अंदर ज्ञान के भावों का उद्गम होता है। यह क्या है ? यह ज्ञान आपमें है। आत्मा ज्ञान का स्रोत है, क्योंकि परमात्मा का अंश होने के कारण यह ज्ञानमयी है । कभी आप देखते हैं कि आप किसी के विचारों को सुनना चाहते हैं । कोई आत्मा के नज़दीक पहुँच जाता है । उसे चाहे कोई नहीं बताया, पर ऐसे विचार उठने लगते हैं । 'सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल।' यह ज्ञान स्वतः ही उठने वाला है । यह कहीं प्रगट है तो कहीं गुप्त । यह शिक्षित, अनपढ़, अमीर, ग़रीब सबमें परिपूर्ण है, इसलिए केवल जगाने की ज़रूरत है। गुरु उर्जा हृदय को प्रकाशित करती है । गुरु नाम दान के समय अपनी सुरति देता है । पर शिष्य का भी सहयोग चाहिए । रहनी बोल रहे हैं— 'नाम सत्य गुरु सत्य, आप सत्य जो होय ।' आपको भी सत्य होना होगा । ‘वाणपति जागसी, काह करे तसकरा ।' यदि घर का मालिक जाग रहा हो तो चोर क्या कर सकता है ! 'उसको काल क्या करे, जो आठ पहर हुशियार ।' हमेशा सुरति में रहना, चेतन रहना; चुपचाप बैठकर देखना कि मन क्या कर रहा है । मन अचेतन अवस्था पसंद करता है । यह परेशान करेगा । यह थकान अनुभव करायेगा । मन को ऊब होती है। जब भी आप ध्यान में बैठते हैं तो पाँच बातों को ध्यान में रखें। ध्यान के सूत्र बोलता हूँ । 1. कमर को सीधा करके बैठना । कमर का दिमाग़ से संबंध है। इसी के सीधे रहने से ही सुषुम्ना खुलेगी। इसी के सीधे रहने से 10वाँ द्वार खुल सकता है। 2. स्वाँसा में भजन चलता रहे। जैसे बैल को रस्सी से बाँधकर खूंटे से बाँध देते हैं तो इधर-उधर नहीं जा सकता है । इस तरह मन को बाँधने के लिए