भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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संशोधित रूप है । यदि साधारण शब्दों में कहा जाए तो परम सत्ता स्वयं जीवों को छुड़ाने में संभव नहीं है, इसलिए वो चंदन के पेड़ की तरह है, जबकि गुरु उस समीर की तरह है, जो परम सत्ता की महक, परम सत्ता का प्रकाश घट- घट में प्रकट कर देते हैं। इसलिए संतों ने गुरु को परमात्मा की बराबरी में भी खड़ा नहीं किया, बल्कि बड़ा कहा । इसलिए यह तो तय है कि गुरु का ध्यान ही सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि-

ताते सर्वा रंभ में, गुरु के सुमिरन मात्र से, विनशत विघ्न अनन्त । ध्यावत हैं सब संत।।

संत-सद्गुरु का ध्यान करने से ही हमें आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति होती है। याद रहे, किसी तप से, किसी योग से ये शक्तियाँ हमें नहीं मिल सकती हैं। योग से केवल दिव्य शक्तियों की प्राप्ति हो सकती है, आध्यात्मिक शक्तियों की नहीं । वास्तव में जब भी हम महापुरुषों के पास जाते हैं, संत- सद्गुरुओं के पास जाते हैं तो तीन तरह से परम सत्ता की किरणें, या दूसरे शब्दों में परमात्म-शक्तियाँ हमें मिलती हैं। पहले वाणी द्वारा । जब भी हम महापुरुषों सत्संग में जाते हैं तो सबसे पहले जब हम उनकी वाणी को ध्यान लगाकर सुनते हैं तो ये शक्तियाँ हमें मिलती हैं । जैसे तार पर चलती हुई बिजली हमारे कमरे तक आ जाती है, इसी तरह संत-महात्माओं की वाणी पर ये शक्तियाँ चलती हुई हम तक पहुँच जाती हैं। दूसरे दृष्टि द्वारा भी ये आध्यात्मिक शक्तियाँ हमारे पास पहुँचती हैं। संत-महापुरुषों की बंदगी के समय उनके साथ दृष्टि मिलाने से भी यही तात्पर्य है कि वे अपनी दृष्टि द्वारा हमें आध्यात्मिक शक्तियाँ प्रदान करें। जब भी हम महापुरुषों के दर्शन को जाते हैं तो सर्वप्रथम उनसे दृष्टि मिलाने का प्रयास करते हैं और चाहते हैं कि उनकी दृष्टि हम पर पड़े। इसलिए यदि दृष्टि न मिले तो समझो कि दर्शन नहीं हुए। फिर तीसरे स्पर्श से भी ये शक्तियाँ हमें मिलती हैं । कहीं भी स्पर्श करके ये शक्तियाँ ली जा सकती हैं, पर अदब के लिए केवल पाँव छूना ही नियम बना दिया गया। महापुरुषों के पास जाने मात्र से हमें इतनी शक्तियाँ मिल जाती हैं । इसी तरह ध्यान से भी ये शक्तियाँ हमें मिलती हैं। जिन स्थितियों में हम गुरु का दर्शन नहीं कर पाते हैं, उन स्थितियों में हमें गुरु का ध्यान करना चाहिए। संभव हो सके तो गुरु का दर्शन करके सीधे ये आध्यात्मिक शक्तियाँ लेनी चाहिए, पर

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