करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 185, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंमन की ताक़त ख़त्म हो जायेगी। क्योंकि आत्मा को बाँधने वाला कोई नहीं है। इसने स्वयं अपनी ही ताक़त अपने ख़िलाफ़ लगा रखी है।
आपा को आपा ही बंध्यो ॥
साहिब कह रहे हैं कि इस आत्मा ने स्वयं अपनी ताक़त से अपने को बाँध दिया है। जैसे स्वान काँच मंदिल में, भरमत भूँक परयो । जैसे काँच के महल में रहने वाला कुत्ता शीशे में अपनी ही परछाई को दूसरे कुत्ते समझ भौंकता - 2 प्राण गँवा देता है। उसने अपने ख़िलाफ़ ही अपनी ताक़त लगाई। ऐसे ही आत्मा भी भ्रमवश स्वयं अपना विनाश कर रही है । इस तरह मन फिर शारीरिक तौर से उलझाने की कोशिश करेगा। ऐसे में इसका चौथा रूप अंहकार सामने आता है । कहेगा कि पाँव सो गया है; कहीं कहेगा कि हाथ थक गये हैं । इस तरह किसी-न-किसी तरह से परेशानी में डालेगा। फिर कहीं कुत्ता ही भौंक देगा, कहीं मच्छर ही काट लेगा। आप उसी के पीछे लग जायेंगे । इसलिए-
समझ पड़े जब ध्यान धरे ॥
आत्म-कल्याण से परे जितनी उर्जा लगा रहे हो, फिज़ूल है। केवल आत्म-साक्षात्कार के लिए यह जीवन मिला है । पर हम शरीर की ज़रूरत के लिए ही सावधान हैं । क्योंकि शरीर की ज़रूरत समझ रहे हैं । आत्मा के लिए फुर्सत नहीं है । किसी ने आत्मा का महत्व नहीं समझा। जो घूमने का शौकीन है, फिज़ूल भी घूमता रहता है । इस तरह आत्म-कल्याण की लग्न होनी चाहिए । जब भी मौका मिले, नाम - भजन में लग जाना चाहिए। एक ने मुझसे पूछा कि नाम - भजन किस समय करना चाहिए? मैंने कहा कि कभी भी कर लो। वो बोला कि कैसे करें? मैंने कहा कि यदि समय न मिले तो चलते-फिरते भी कर सकते हैं, लेटे-लेटे भी कर सकते हैं। पर वैसा भी नहीं करना जैसे एक पटवारी का बेटा कर रहा था। एक दिन पटवारी आकर कहने लगा कि आपने हमारे बेटे को सोने का लाइसेंस दे रखा है; वो सोता ही रहता है। कहा कि वो छोटेपन से अधिक सोता है । पहले तो हम उठा देते थे, पर जबसे आपका नाम लिया है, हम उसे उठा नहीं पाते हैं। मैंने पूछा—क्यों ? वो बोला कि जब भी उसे उठाओ तो कहता है कि मैं ध्यान में हूँ।