भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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गुरुमुख लाहा चले, मनमुख मूल गँवाय ॥

लाहा व्याज को कहते हैं ।

मनमुख चले मूल गँवाय ॥

वो तो मूल ही गँवा देता है। यानी जो गुरु ने पूंजी दी, वो ही गँवा देगा । इसलिए गुरु-भक्ति को समझें । मनमुखता से बचें अब आपको सद्गुरु के अलावा कहीं और भटकना नहीं है। नहीं तो भक्ति दूषित हो जायेगी। जो-जो सद्गुरु कहे, वही करना । जो बातें मना करे, वो कतई नहीं करना। जो-जो बातें वर्जित हैं, मना हैं, मनमुखता की पहचान हैं, वो समझ लें। सयानों के पास नहीं जाना है चाहे कुछ भी हो जाए, सयानों के पास नहीं जाना है। आपको भूत लग ही नहीं सकता है। वो केवल भ्रमित ही करेगा। एक - एक सयाने से विस्तार से पूछता हूँ कि क्या करते हो? एक अखनूर वाले सयाने का पुंछ, राजौरी तक संबंध था। पहले हमारी निंदा करता था, अब भक्त हो गया है । मैंने उससे पूछा कि क्या करते हो ? हत्या कैसे बुलाते हो ? कहा कि यह मत पूछो। मैंने कहा—नहीं, जानना चाहता हूँ। कहा कि हमारी एक टीम होती है। मिलकर काम करते हैं । हम चार लोग थे । उसमें किसी का 20 प्रतिशत होता था, किसी का 30 प्रतिशत हिस्सा था और किसी का 40 प्रतिशत हिस्सा था। कहा कि इसमें ग्राहक बिठाने पड़ते हैं। पहले देखते हैं कि फलाना काकू मानो सीधा है, बीबी भी सीधी है । अब ऐसा होता है कि हममें से एक काकू के घर के बाहर रात को किसी पेड़ पर छिपकर पत्थर फेंकेगा। फिर अजीब-अजीब आवाजें लगाकर काकू को पुकारेगा। अब काकू जब बाहर आयेगा तो पेड़ पर तो रात को दिखता नहीं । वैसे भी ध्यान वहाँ नहीं जाता । तो काकू वापिस अन्दर.... । पर एक थोड़ा-सा डर पैदा हो गया। अब दूसरे का काम है कि काकू के घर रात को जाकर कटड़ा खोल देना । वो रजकर दूध पी लेगा। सुबह जब काकू की बीबी दूध दुहने लगे तो भैंस टाँग मारेगी। अब संशय बढ़ गया। फिर तीसरा किसी बहाने से जाकर पूछता है कि फलाने का घर कहाँ है ? फिर