भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

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पानी पीने के बहाने बैठ जाता है । अब यहाँ-वहाँ देखकर कहेगा कि आपके घर तो कुछ ग़लत लग रहा है, ज़रूर कोई चीज़ है । तो काकू की बीबी झट से कहती है कि हाँ, हाँ, हमें भी लगता है। अब वो कहता है कि बहुत बड़े सयाने का नाम सुना है; वो वहाँ है; पूरा तो पता नहीं, पर रहता वार्ड नम्बर इतने में है शायद। यानी सब पता दे देता है। शाम को काकू घर आता है तो बीबी कहती है कि परेशानी है । वो कहता है कि क्या करें ? फिर वो बताती है सयाने का पता । काकू वहाँ पहुँचता है । अब चौथा मैं वहाँ होता हूँ । मुझे पता है कि आने वाला है । काकू परेशानी बताता है । मैं कहता हूँ कि मेरे पास समय नहीं है, मैं नहीं पहुँच सकता। वो कहता है कि आज ही चलो, घर की हालत ख़राब है, कोई मर भी सकता है । फिर मैं चलता हूँ। फिर कहा कि क्या होता है कि कभी खुद ही ढोल पीटता हूँ। अगर माँ जिंदा है तो कहता हूँ कि दादी की हत्या आ गयी है घर में। चीज़ बड़ी ख़तरनाक है, ऐसे नहीं जायेगी, यह - यह करना पड़ेगा, खर्च काफ़ी आयेगा । काकू बेचारा नीमा हो जाता है........ इतना नहीं कर पाऊँगा। तो मैं कुछ कम कर देता हूँ। फिर डायरी लेकर लिखता हूँ कि इस दिन इसके घर । ऐसे कहीं ढोल पीटना, किसी को डोरा - ताबीज देना, कहना कि अब तीन महीने या चार महीने तक कुछ नहीं हो सकता। वो भी खुश रहता है कि अब कुछ नहीं हो रहा है, सोचता है कि कल्याण है। फिर पहले वाला तीन महीने बाद शुरू हो जाता है बट्टे । कहा कि जिंदगीभर नहीं छोड़ते हैं, जिसे एक बार पकड़ लेते हैं। कहा कि कभी-कभी मार भी पड़ जाती है। एक की हत्या निकालने गये तो एक को हिस्सा कम दिया। बाद में वो नाराज़ हो गया, जाकर घर वालों को सच सच बता बैठा । जब अगली बार पहुँचे तो गाँव वालों ने धुनाई कर दी। भागे कहीं कहीं। ख़ैर, जमाना बदल रहा है। अब शास्त्री आ रहे हैं, सतवा कर रहे हैं। सयाने शास्त्रियों के रूप में बदल गये हैं । रोल बदल दिया । क्यों ? क्योंकि सयानों को समझ रहे हैं लोग । जब मैं यहाँ आया तो जागराते होते थे । लोगों ने फेल किया । फिर वही सयाने के रूप में बदल गये । अब वही सयाने शास्त्री हो रहे हैं । जिसने इस तरह का धन खाया, दूसरा धन नहीं का सकता । जिस शेर ने आदमी का माँस खा लिया, फिर उसे किसी जानवर का माँस अच्छा नहीं लगता, क्योंकि आदमी का माँस स्वादिष्ट है । इस तरह वे सयाने फिर कमाकर