भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 192

सतगुरु शब्द सहाई ॥

निकट गये तन रोग न व्यापै, पाप ताप मिट जाई ॥

जादू यंत्र जुक्ति न लागे, शब्द के बाण डहाई ॥

ओझा डायन उर डर डरपे, जहर जूड़ हो जाई ॥

कहैं कबीर कादूँ यम फँसा, सुकृत लाख दुहाई ॥

तो नाम के बाद बड़ी ताक़त आ जाती है । पहले जब मेरे पास बंदा आया तो ज्ञान- - दृष्टि से नहीं आया। किसी को भूत नचा रहा था तो किसी को कोई और समस्या थी। जब वो ठीक हुआ तो धीरे-धीरे मैंने उसे रूहानियत समझाना शुरू किया। उसे यक़ीन आता गया कि यहाँ कुछ है। धीरे-धीरे मैंने रूहानियत का पाठ पढ़ाया । किसी का धर्म नहीं बदला। हम किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं हैं। पर कह रहे हैं कि एक परमात्मा की भक्ति से पूरे ब्रह्माण्ड की भक्ति हो जाती है। हम कह रहे हैं कि प्रेतात्मा आती है, पर नाम के बाद नहीं आयेगी । ऐसा नहीं कह रहे हैं कि पितर नहीं हैं । पितर आते हैं । वो डिमाण्ड भी रखते हैं। पर सभी तीन-लोक के दायरे में आ रहे हैं । हम कह रहे हैं कि एक चौथा लोक है। आत्मा का देश वहाँ है । आदमी जब भूत-प्रेतों में भटका है तो तीन-लोक की बात भी बड़ी दूर की बात है, अन्दर की दुनिया की बात भी बड़ी दूर की बात है । घर में सिनक निकल आए तो कहते हैं कि बाबा सुरगल है । सब माथा टेकने लगते हैं उसे। कहते हैं कि बाबा सुरगल कल्याण करेगा । कल्याण तो सयाने का होता है, जो आपको बुद्धू बनाकर आपका माल लूटकर ले जाता है । मैंने एक लड़की को देखा। वो कहती थी कि देवी माता आती है। मैंने कहा- - बैठो। वो सिर घुमाए । मैंने एक को कहा कि इसे थोड़ा कसो । वो चालाकी कर रही थी। 99 प्रतिशत चालाकी वाले होते हैं। वो तेज़ी से काँपती हुई पीछे-पीछे जाती थी। मैं जब तह में जाता हूँ तो अधिकतर नाटक होता है। तो वो चोरी से पीछे भी देख रही थी कि कहीं कोई चीज़ तो नहीं पड़ी, कहीं किसी चीज़ से टकरा न जाऊँ ! फिर वो बड़े स्टाइल से आगे की तरफ गिरी । एक गिरना बनावट से होता है । जो अचानक होता है, उसमें तो सिर भी फट सकता है। मैंने कहा कि दुबारा गिरी तो देखना । कोई भूत नहीं आता है यहाँ। आश्रम की सीढ़ी के अन्दर भूत आता नहीं है । पहले मैं सत्संग करता था तो