भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 197

आपको इनमें नहीं उलझना है। अब तो आपको गुरु भक्ति की ऊँची सीढ़ी पर आगे-ही-आगे बढ़ना है । फिर गुरु की भक्ति से पूरे ब्रह्माण्ड की भक्ति एक साथ हो जाती है।

देवी देवल जगत में, कोटिन पूजे कोय ।

सतगुरु की पूजा किये, सबकी पूजा होय ।।

तथा-

कोटिन तीर्थ भ्रम भ्रम आवे । सो फल गुरु के चरणन पावे ।।

फिर यह काम करने से भक्ति भी दूषित होगी । अगर कहीं मजबूर हो जाओ, घर वाले जबरन ले जाएँ तो कोई बात नहीं, दिल में सद्गुरु का ही नाम लेते रहना, पर भूल से भी पैसा नहीं चढ़ाना । चंदा नहीं देना है चंदा और भीख नहीं देनी है । गुरु चरणों के अलावा कहीं भी अपने धन को दान रूप में देना या चढ़ाना नहीं है । यह इसलिए मना किया क्योंकि यदि आपके द्वारा दिये गये धन का ग़लत इस्तेमाल हुआ तो उस अपराध में आप भी शामिल हो जायेंगे। इसलिए बचना। चंदा और भीख दोनों को समान मानता हूँ। दोनों से परहेज करना। अन्य बातें किसी का जूठा मत खाएँ । क्योंकि आप महात्मा हो जायेंगे । आप हंस हो जायेंगे। हंस न किसी गंदी जगह चोंच मारता है, न किसी का झूठा खाता है। जिसके पास नाम नहीं, वो कभी भी अच्छा नहीं हो सकता है। ‘ऊँच वही जो नाम है जाना । बिना नाम सब नीच बखाना।।' जिसका जूठा खायेंगे, उसके गुण भी आपमें आ जायेंगे। इसलिए सावधान रहना । जिस घर में माँस बनता हो, वहाँ मत खाएँ। हो सके तो पानी से भी परहेज रखें। क्योंकि माँस के अंश धोने के बाद भी बर्तनों में लगे होंगे। किसी भी जगह का प्रसाद मत खाएँ ।