करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमैं अन्य तीर्थ स्थानों पर भी गया हूँ । जहाँ-जहाँ गया हूँ, वहाँ-वहाँ जाकर सबसे बात भी की है । वहाँ क्या-क्या चल रहा है, कैसे-कैसे रीति-रिवाज हैं, यह सब जानने के लिए मैं सब तीर्थ स्थानों पर गया हूँ। सब धर्म-शास्त्रों का भी ज्ञान है । सब पढ़े हैं। इतने आपने नहीं पढ़े होंगे। इतने तीर्थ भी आपने नहीं किये होंगे। इसलिए इस बात को अच्छी तरह से समझ लें कि हमारी किसी से कोई लड़ाई नहीं है, लेकिन इन चीज़ों से आपकी आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है और फिर आपका ध्यान दो जगहों पर होगा तो गुरु-भक्ति जमेगी नहीं, इसलिए अपने गिर्द ही घुमा रहा हूँ। यह एक ही मन है, इसलिए एक जगह पर ही लगना चाहिए। संक्षेप में यह बात समझ लें कि गुरु-भक्ति के अलावा अन्य कोई भी भक्ति न करें। कोई भी ऐसा काम न करें, जो अन्य भक्ति में भक्ति दूषित हो जाए। नहीं तो आपका ध्यान और विश्वास दो शामिल हो जाए। कोई भी ऐसा काम न करें, जिससे गुरु- जगहों पर हो जायेगा और आप काल - पुरुष की दुनिया में ही अटक जायेंगे। गुरु पर पूरा भरोसा रखना है । अगर आप अन्य काम कर रहे हैं तो इसका सीधा मतलब है कि गुरु पर भरोसा नहीं है । इसलिए गुरु पर पूर्ण भरोसा और समर्पण के लिए ही इन सब चीज़ों से बचना है अन्यथा हमारी किसी से लड़ाई नहीं 'सब अपनी-अपनी जगह पर हैं। पर आपको इनसे ऊपर उठकर अब गुरु-भक्ति की ऊँची सीढ़ी पर चढ़ना है। अब नयी जिंदगी जीनी है, जिसमें गुरु के अलावा कोई सहारा न ढूँढ़ना। पहले जो-जो किया, सब भूल जाएँ । कोई भी आपको तंग नहीं कर सकता है। शिष्य को चाहिए कि चाहे कितनी भी मुसीबत आ जाए, गुरु को त्यागकर अन्य जगहों पर न भटके।
सुख में तुझे न भूलूँ, दुख न हार मानूँ ।
ऐसा प्रभाव भर दे, मेरे अधीर मन में ।।
यह सब मनमुखता से बचने को कहा।
गुरुमुख बनें अब क्या-कुछ करें, जिससे गुरुमुख बन सकें? धर्मदास जी ने साहिब