भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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कबीर संगत साधु की, ज्यों गंदी की बास ।

जो गंदी कुछ देत नहीं, तो भी बास सुवास ॥

महापुरुषों के दर्शन से इतनी आध्यात्मिक उर्जा मिलेगी, जितनी कि दीर्घ साधना करने पर भी नहीं मिलेगी । फिर जब दीक्षा ली जाती है तो एक नाम के रूप में एक मूल उर्जा मिल जाती है । तब बात और हो जाती है । ... तो महापुरुषों के शरीर से किरणें निकलती हैं; वो मिलने से शांति का अनुभव करेंगे। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि गुलाब के फूल में ताक़त है कि मस्तिष्क को ताक़त देता है, तरोताजा रखता है। नेहरू जी अपने पास गुलाब का फूल रखते थे। जब भी आप बगीचे में पहुँचते हैं, तो सकून मिलता है। इसी तरह महापुरुष के पास से आध्यात्मिक शक्तियाँ निकलती हैं, जिनसे शांति मिलती है । इसलिए उनके दर्शन का लाभ है ।

कबीरा मन पंछी भया, उड़ के चला आकाश ।

स्वर्ग लोक खाली पड़ा, साहिब संतन पास ॥

रामायण भी कह रही है-

नहीं दरिद्र सम दुख जम आना । संत मिलन सम सुख नहीं जाना ॥

इसलिए महापुरुष के सत्संग में आस्था मिलती जायेगी, अंत:करण स्वीकार करता जायेगा, इसलिए महापुरुष कहता है कि सत्संग सुनो। इसलिए गुरु अच्छी तरह परखकर करना चाहिए। पर बाद में कहीं परखने की गुंजाइश नहीं है। पहले आप स्वतंत्र हो, शंकाओं का निराकरण करें । इसलिए सत्संग शंकाओं का निराकरण करने का सूत्र है। बार-बार गुरु-दर्शन करें गुरु का दर्शन कीजिए, दिन में कई-कई बार । आसूया का मेह ज्यों, आसूया के मेह में क्या है ? जब स्वाति की बूँद सीपी के पेट में पड़ती

बहुत करे उपकार ॥

है तो मोती बन जाती है; वही बूँद जब बाँस में पड़ती है तो बंसलोचन बन

जाती है; जब वो बूँद पत्थर पर पड़ती है तो पारा बन जाती है; वही जब हाथी

के कान में पड़ती है तो गजमुक्ता बनती है और केले के पड़ती है तो कपूर बन

जाती है। तो कई लाभ हैं उसके । इस तरह पूर्ण गुरु का दर्शन लाजवाब है।