भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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गुरु-दर्शन करना। यह गुरु- भक्ति है । गुरु दर्शन का बड़ा महत्त्व है। इसलिए तो साहिब कह रहे हैं कि दिन में एक नहीं बल्कि हो सके तो अनेक बार गुरु का दर्शन करना चाहिए । आख़िर गुरु- दर्शन का इतना महत्त्व क्यों कहा गया ? क्या मिलेगा हमें गुरु-दर्शन से ? आओ, इस ओर चलते हैं । मनुष्य के पास तीन शक्तियाँ हैं – भौतिक, दिव्य तथा - आध्यात्मिक । भौतिक दृष्टि से मनुष्य बड़ा सक्षम जीव है। भौतिक शक्तियों के बल से ही इसने पृथ्वी को सजाया तथा सँवारा है। बड़ी-बड़ी निराली चीज़ें बना डाली हैं। जैसे हमारे अधुरे काम को आगे चलकर हमारे बच्चे पूरा करते हैं, इसी तरह परमात्मा ने कुल सृजन तो स्वयं किया, यानी उसने चाँद, तारे, सूर्य, पृथ्वी, जल, पहाड़ आदि बनाए; पर यदि पृथ्वी को किसी ने सुन्दर बनाया तो केवल मानव ने। कहीं पहाड़ों को काट-काट कर सड़कें बनाईं, कहीं मकान बनाए, कहीं बड़ी-बड़ी ईमारतें खड़ी कर दीं। यह सब परमात्मा ने नहीं बनाया था। फिर कहीं टेलिफोन, कहीं हवाई जहाज़ और न जाने क्या-क्या ! ये चीज़ें परमात्मा ने आकाश से नहीं टपकाईं; मनुष्य ने ही इनका सृजन किया। इन सबके पीछे इन्सान की भौतिक शक्ति काम कर रही है । पर इस भौतिक शक्ति की एक सीमा है। जैसे यदि कोई सोचे कि वह उड़े तो वो उड़ नहीं पाता है। यह क्षमता इन्सान में नहीं है । हमारी आँखें कुछ दूर तक ही देख पाती है। अधिक दूर होने पर कोई भी चीज़ हमें स्पष्ट नज़र नहीं आती है। इसलिए इन आँखों की एक सीमा है । हमारे कानों की क्षमता भी सीमित दायरे में है । एक किलोमीटर दूर अगर कोई चिल्ला-चिल्ला कर भी बोल रहा हो तो हमें उसकी आवाज़ सुनाई नहीं पड़ती है । इस तरह भौतिक शक्तियों की एक सीमा है। पर फिर भी इनसे हम बड़े-बड़े काम कर लेते हैं। इसके ऊपर फिर दिव्य शक्तियों का स्थान आता है । ये दिव्य शक्तियाँ भी प्रत्येक मानव की पकड़ में हैं; पर अफ़सोस ! मानव इनसे परिचित नहीं है। ये दिव्य शक्तियाँ हमारे शरीर में पाँच स्थानों पर स्थित हैं। आम आदमी इन शक्तियों से बेख़बर है; वो इनका इस्तेमाल नहीं करता है । किसी भी चीज़ का यदि हम अधिक देर तक इस्तेमाल न करें तो वो काम करना बंद कर देती है। जैसे कोई गाड़ी यदि दो-तीन महीने ऐसे ही पड़ी रहे तो वो सीज़ हो जाती है;