करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउसकी सब चीजें काम करना बंद कर देती हैं; फिर यदि उसे चलाना हो तो दिक्कत आयेगी। इसी तरह इन शक्तियों का इस्तेमाल मानव ने नहीं किया, इसलिए ये भी सोयी पड़ी हैं । योगी लोग ध्यान करके इन शक्तियों को जगाते हैं; इसलिए ज़रूर वे आम आदमी से श्रेष्ठ हैं, ताक़तवर हैं । कुछ योगी आँखों के मध्य छिद्र में ध्यान करके वहाँ सोयी पड़ी शक्तियों को जगाते हैं, उन्हें प्राप्त करते हैं और साधारण आदमी से बहुत ऊँचे उठ जाते हैं । साधारण मनुष्य तो उनसे आँख नहीं मिला पाते, क्योंकि उनके मस्तिष्क का हिस्सा बहुत तेज़ हो जाता है । फिर कुछ योगी आज्ञाचक्र पर अपने ध्यान को रोककर वहाँ की दिव्य शक्तियों को जगाते हैं । कुछ योगी बंकनाल में अपने ध्यान को रोकते हैं; वहाँ वे अनहद धुनें सुनते हैं और अनेक दिव्य शक्तियों को प्राप्त करते हैं । इसके बाद फिर आध्यात्मिक शक्तियों का स्थान आता है । ये भी प्रत्येक मनुष्य के अन्दर हैं, पर इन शक्तियों को मनुष्य अपने ज़ोर से प्राप्त नहीं कर सकता। ‘बिन सतगुरु पावे नहीं, कोई कोटिन करे उपाय ।' अतः आध्यात्मिक शक्तियों का ख़ज़ाना केवल संत-सद्गुरुओं के पास है । इसलिए संत - सद्गुरु की कृपा के बिना इस ख़ज़ाने को प्राप्त नहीं किया जा सकता । जैसे बालक स्तन-पान करता है । वो बालक की उर्जा का स्त्रोत है। ऐसे ही गुरु स्त्रोत है। उनका ध्यान स्त्रोत है उर्जा का, लेते जाना । यह है- आसान मार्ग । कोई साधना आपने नहीं की, आप बदलते जायेंगे । एक फौजी आया, कहा- पहले मैं बड़ा बुरा इंसान था, किसी को देखते ही मारना शुरू कर देता था, पर अब बिलकुल बदल चुका हूँ; मुझे खुद भी पता नहीं चला कि यह सब कैसे हुआ । मैं उसे समझाने लगा। मैं : यह ध्यान की ताक़त है । : कभी किया ही नहीं ध्यान । ठाठ : वो भी नहीं किया करता हूँ । यह नाम की ताक़त है । सत्संग का कमाल है ।