भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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दोय वक्त न हो सके, दिन में करै इक बार ।

सद्गुरु दर्शन के किये, उतरे भवजल पार ॥

कह रहे हैं कि फिर दिन में एक बार ही कर लो; संसार-सागर से पार हो जाओगे। जैसे हम एक दिन खाना नहीं खाएँ तो हमारा शरीर कमज़ोर होने लगता है, शरीर की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है, क्योंकि रोटी से ही तो शरीर को उर्जा मिलती है; पर यदि दूसरे दिन भी भोजन मिल जाए तो वो कमी पूरी हो जाती है । तभी तो साहिब आगे कह रहे हैं- एक दिना न करि सके, दूजे दिन करि लेहि ।

सद्गुरु दर्शन के किये, पावे उत्तम देही॥

पर यदि ऐसा भी सम्भव न हो सके यानी यदि गुरुजन बहुत दूर हैं, तो फिर साहिब उसका भी विकल्प दे रहे हैं-

दूजे दिन न कर सके, चौथे दिन कर जाय ।

सद्गुरु दर्शन के किये, मोक्ष मुक्ति फल पाय ॥

कह रहे हैं कि फिर चौथे दिन ही करो, मोक्ष के अधिकारी बन जाओगे। यदि तीन दिन रोटी नहीं मिली, कमज़ोरी तो आ गयी, पर चौथे दिन भी मिल गयी तो वो कमी पूरी हो सकती है । इसी तरह मन तो मोटा होता जाएगा, पर फिर उर्जा मिलते ही वापिस अपनी जगह आ जाएगा। आत्मा के ऊपर मन-माया का जो आवरण पड़ा हुआ है, उसे हटाने के लिए हमें आध्यात्मिक उर्जा की सख्त जरूरत है, इसलिए हमें समय-समय पर गुरु - दर्शन करके यह उर्जा लेते रहनी चाहिए । लेकिन यदि कहीं गुरुजन और दूर हों, इतना भी सम्भव न हो सके, तो फिर ! साहिब इसका भी विकल्प दे रहे हैं- चौथे दिन नहिं कर सके, बार-बार करु जाय ।

यामें विलम्ब न कीजिये, कहै कबीर समुझाय ॥

अब यहाँ साहिब सतर्क कर रहे हैं । कह रहे हैं कि यदि चौथे दिन भी सम्भव न हो सके तो सप्ताह में, हफ्ते में एक बार गुरु-दर्शन अवश्य करो। इसमें विलम्ब न हो, देरी न हो । नहीं तो आत्मा कुंद होती जाएगी और मन का ज़ोर बढ़ता जाएगा; मन आत्मा पर हावी होता जाएगा। आध्यात्मिक उर्जा से ही आत्मा के ऊपर से मन-माया का आवरण हटता है, इसलिए हमें जल्दी - 2 गुरु - दर्शन करने चाहिए । जितनी बार हो सके,

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