भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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उतने करने चाहिए। गुरु-दर्शन में बहुत सारी बाधाएँ भी आयेंगी, पर हमें उन बाधाओं के होते भी रुकना नहीं है । साहिब कह रहे हैं- माता पिता सुत स्त्री, बन्धु कुटम्ब को जान । गुरु दर्शन उनका अटका ना रहे, गुरु दर्शन को जाय।

को जब चले, ये अटकावे आन ॥

कहै कबीर सो सन्त जन, मोक्ष मुक्ति फल पाय ॥

ये सब गुरु-दर्शन में रुकावट डालेंगे, पर तुम नहीं रुकना, क्योंकि तुम्हें वो उर्जा लेनी ही लेनी है। जैसे वृक्ष अपनी उर्जा ज़मीन से लेते हैं; पूरी शक्ति ज़मीन से लेने के बाद भी एक उर्जा की ज़रूरत उन्हें पड़ती है और वो है सूर्य की । उसके बिना वृक्ष पोषित नहीं हो सकता। इसी तरह अपनी शक्ति से योगिक क्रियाओं द्वारा मनुष्य कितनी ही शक्तियाँ क्यों न प्राप्त कर ले, इस भवसागर से पार नहीं हो सकता। इसके लिए सद्गुरु के द्वारा प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक उर्जा की नितान्त ज़रूरत है । इस पर साहिब बड़ा प्यारा शब्द कह रहे हैं- - अबहीं नाहीं गुरु कै बच्चा, अबहीं कच्चा रे कच्चा । कहीं गुप्त कहीं परगट होवे, गोकुल मथुरा काशी । पवन चढ़ावे सिद्ध कहावे, होय सूर्य लोक का वासी ।

तबहूँ नाहीं गुरु कै बच्चा, अबहीं कच्चा रे कच्चा ॥

कह रहे हैं यदि इतनी शक्तियाँ आ जाएँ कि एक जगह से प्रगट होकर दूसरी जगह पहुँच जाए यानी जम्मू से गुप्त होकर काशी में प्रगट जो जाए या फिर मथुरा से गुप्त होकर कैलाश पर्वत पर प्रगट हो जाए तो भी समझो, आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति नहीं हुई, वो उर्जा नहीं मिली; इसलिए ‘अबहीं कच्चा रे कच्चा ' । जब तक सद्गुरु द्वारा मूल उर्जा नहीं मिलती, तब तक अपूर्ण रहेगा। आगे कह रहे हैं- करि अस्नान भभूत चढ़ावे, ब्रह्म अग्नि उद्गारे गा । जल के ऊपर आसन मारे, जो बोले सो होवेगा ।

तबहूँ नाहीं गुरु कै बच्चा, अबहीं कच्चा रे कच्चा ॥

यदि इतनी शक्ति भी आ जाए कि जो बोले, हो जाए यानी वाक्