करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 215, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंसहज-मार्ग है हमारा
परमात्म-तत्व की प्राप्ति के लिए तीन सूत्र नज़र आ रहे हैं- 1. योग - मार्ग 2. ज्ञान - योग 3. भक्ति - योग कोई योग-मार्ग बोल रहा है, कोई ज्ञान - योग बोल रहा है तो कोई भक्ति-योग बोल रहा है। तीन मार्ग दिखाई दे रहे हैं। अगर खामोशी से देखें तो दुनिया में जितने भी लोग हैं, इन तीन रास्तों का अनुकरण कर रहे हैं । ये तीनों मार्ग नज़र आ रहे हैं । इस तीन सूत्रों पर अच्छी तरह से चिंतन करना होगा । इन तीन पर चलकर हम कहाँ पहुँच सकते हैं! क्या है योग-मार्ग अंदर की दुनिया में जाने के लिए तीन सूत्र हैं - मीन, पपील और विहंगम । इस तरह काफ़ी लोग योग, कमाई की बात कर रहे हैं । जब भी योग या ध्यान की तरफ चलेंगे तो पंच मुद्राएँ हैं। योग पंच मुद्राओं की तरफ है। भारत के बड़े-बड़े जो पंथ हैं, वो इन्हीं की ओर इशारा कर रहे हैं। पर क्या चाचरी मुद्रा से परम-मोक्ष की प्राप्ति मिल जायेगी ? साहिब ने आपेक्ष किया, कहा कि नहीं होगा ऐसा । कुछ शक्तियाँ प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन इस योग मुद्रा से हम परम तत्व की प्राप्ति कतई नहीं कर सकते हैं । इससे हम अंदर की विरोधी शक्तियों से बाहर नहीं निकल सकते हैं। बड़े-बड़े योगियों ने बड़ी कठिन तपस्याएँ की, पर विरोधी शक्तियों ने आगे नहीं बढ़ने दिया। पराशर आदि बड़ी तपस्याएँ करके भी काम को नहीं जीत पाए । कपिल मुनि आदि की तपस्या भी क्रोध ने समाप्त कर दी। इस तरह पता चल रहा है कि जिनके द्वारा आत्मा आच्छादित है, उनको हम योग आदि के द्वारा काबू में नहीं