करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिकल सकता है। मन बहुत ताक़तवर है, प्रमाण मिलते हैं कि योग-साधनाएँ करने के बाद भी मनुष्य अपने मन को नहीं जीत पाया । क्या है ज्ञान-मार्ग ज्ञान-मार्ग का मतलब है कि ज्ञान के द्वारा परम-तत्व की प्राप्ति करना । क्या हम ज्ञान के विरोधी हैं ? नहीं। रावण बहुत बड़ा ज्ञानी था, लेकिन कामातुर होकर परस्त्री को उठा लाया। वो चार वेदों का ज्ञाता था । राजनीति में भी वो निपुण था। जब मरणासन्न अवस्था में पड़ा था तो राम जी ने लक्ष्मण जी से कहा कि जाओ, रावण से राजनीति की शिक्षा लेकर आओ । यानी इतना बड़ा ज्ञान था, पर मन - माया के दायरे में ही रहा न । इन चीज़ों से बाहर नहीं निकल सका। क्या है भक्ति-योग भक्त का मतलब ही है—विषयों का त्याग। वही भक्त है, जो भग न भोगे। यानी संभोग न करे । अष्ट प्रकार के मैथुन हैं, उनसे दूर रहे। लेकिन कलयुग में मनुष्य भक्ति नहीं कर पा रहा है । पर संत कह रहे हैं कि चिंता मत करो, सद्गुरु पार कर देगा । योग में गुरु का इतना महात्म नहीं है । तो आप कहेंगे कि भक्ति का खण्डन है । नहीं ।
भक्ति स्वतंत्र सकल गुण खानी । बिनु सत्संग न पावे प्राणी ॥
पर भक्ति आसान नहीं है । इस तरह ये तीन मार्ग बताए । अब संतों का मार्ग इस तीनों से परे है । आओ, संत- मार्ग को समझते हैं । क्या है संतों का सहज-मार्ग संतत्व की धारा सहज - मार्ग की ओर जा रही है । वो है शरणागति । साहिब कह रहे हैं कि आपको कुछ नहीं करना है; सद्गुरु पार कर देगा । योग-मार्ग में योग का महात्म है, गुरु कृपा का नहीं; ज्ञान-मार्ग में ज्ञान का महात्म है, गुरु कृपा का नहीं; भक्ति मार्ग में भक्ति का महात्म है, गुरु-कृपा का नहीं। पर संतत्व की धारा में, संत - मार्ग में केवल गुरु कृपा का