भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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इसी से पूरी दुनिया है, इसी कारण आत्मा मेरा-मेरा कह रही है। जब मन गुरु ने ले लिया तो आपका अपना मान कैसा रहा ! इसलिए गुरुजनों से कभी मान नहीं चाहना । उनकी बात काटकर कभी अपनी न चलाना ।

गुरु की बात मान सब लीजे । सत्य असत्य विचार न कीजे ॥

अपना दिमाग़ नहीं लड़ाना कि गुरु जी सत्य कह रहे हैं या असत्य। जो कहें, मान लेना; जो कहें, बिना अपने तर्क लड़ाए कर देना। जीवन में कभी गुरु- आज्ञा न टालना। गुरु के आगे अपनी नहीं चलानी है, चाहे आपको आपके हित में लगे या नहीं । गुरु की सेवा ही सफल है । यह मानव-तन में सेवा को मौका मिला है तो इससे गुरु की सेवा कर लो। इस शरीर को तो निचोड़ देना है, क्योंकि- आखिर यह तन ख़ाक मिलेगा... इसलिए जुट जाना है। बाकी जितने भी कर्म हैं, किसी खाते में नहीं आयेंगे। यदि दिन-रात खेती-बाड़ी की, नौकरी-पेशा किया, कोई काम नहीं आयेगा। पर गुरु की जो सेवा की, वो ही काम आयेगी। यदि शिष्य गुरु की सेवा नहीं किया तो यह अपराध है । इसलिए यह ज़रूरी है।

नानक जो गुरु सेवे अपना, हौं तिस बलिहारी जाऊँ ॥

गुरु-सेवा बहुत बड़ी बात है । साहिब कह रहे हैं-

गुरु सेवे कटे दुख पापा । जनम जनम को मिटे सन्तापा ॥

गुरु की सेवा सदा चित दीजे । जीवन जन्म सुफल करि लीजै ॥

चौबीस रूप हरि आपुहि धरिया । गुरु सेवा करि सबहि बिरिया ॥

शिव बिरंचि गुरु सेवा कीन्हा | नारद दीक्षा ध्रुव को दीन्हा ॥

सकल मुनि गुरु सेवा चाही । गुरु सेवा करि पंथ अवगाही ॥

गुरु की सेवा मुक्ति निज पावे । बहुरि न हंसा भवजल आवे॥

गुरु-सेवा की बड़ी महिमा है । बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों ने भी गुरु- सेवा की। हरि ने भी अवतार धारण करके गुरु- सेवा में मन को लगाया। जिसने मानव-तन को पाकर गुरु धारण नहीं किया वो तो अभागा है ही, पर जिसने गुरु धारण करके फिर उनकी सेवा नहीं की, वो महामूर्ख है।

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