करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 226, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंजितनी महिमा गुरु-सेवा की है, उतनी किसी अन्य चीज़ की नहीं । साहिब कह रहे हैं— नामवंत कहैं कबीर धर्मदास से, गुरुवंता कोई एक ॥ बहुते मिले, ज्ञानवंत अनेक । गुरु-सेवा में सब फल मिल जायेंगे, सब सुखों को प्राप्ति हो जायेगी। साहिब कह रहे हैं—
गंगा यमुना बद्रीश समेते । जगन्नाथादि धाम हैं तेते॥
सेवे फल प्राप्त होय न तेतो । गुरु सेवा में पावै फल तेतो ॥
कह रहे हैं कि गंगा, यमुना, बद्रीनाथ, जगन्नाथ आदि धाम जाकर भी वो फल प्राप्त नहीं होने वाला, जो फल गुरु की सेवा में मिल जायेगा ।
यह निश्चय उर धारे, मो अघ बिसरि नाथ मोहि तारे ॥
यानी भरोसा रहे, चाहे मैं कुछ करूँ या नहीं, मेरे गुरु मुझे पार कर देंगे। यह विश्वास, यह भरोसा बहुत बड़ी चीज़ है । तन सबको नहीं देते। पर आपने दे दिया। एक भरोसा, एक विश्वास था । मैंने नाम-दान के समय आपसे कुछ नहीं माँगा, केवल विश्वास ही माँगा था । विश्वास क्या ? विश्वास यह कि कभी झूठ नहीं बोलते । विश्वास यह कि—
गुरु को अखंड ब्रह्म कर जाने । गुरु को नहीं मानुष कर माने ।।
यह निश्चय मन माहीं । गुरु तजि मोर सहायक नाहीं ॥
गुरु के अलावा कोई सहारा न ढूँढ़ना । यह भरोसा रखना कि के अलावा मेरा कोई सहायक नहीं हो सकता है । जब सच्चा सद्गुरु मिल गया तो कहीं माथा पटकने की आपको ज़रूरत ही क्या पड़ी है ! मत करो ऐसा । दो किश्तियों में पाँव मत रखो। सद्गुरु मिल गया तो सद्गुरु की ताक़त सुपर है, वहीं सब कुछ मिल जायेगा । नहीं भी मिला तो भी उसी की रज़ा में रहना । | चाहे कितनी भी आफत आ जाए, यही सोचना-
दुनिया के लखां सहारे, मेरा सहारा तू है ।।
यह नहीं कि थोड़ी-सी मुसीबत आई तो कहीं सयाने के पास चल पड़े तो कहीं ज्योतिषि के पास । ऐसा न हो।