भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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जैसे माता-पिता से शरीर बना, उन्होंने जन्म दिया तो वे आदरणीय हैं, उनकी सेवा करनी चाहिए । जो माता-पिता की सेवा नहीं करता, उनकी आज्ञा नहीं मानता, वो दोषी है । इसी तरह सच्चे गुरु की सेवा का महत्व है। वो भी कुछ देता है। वो आत्मा को कुछ देता है और उसे उसके सच्चे पिता, सच्चे प्रियतम (साहिब) के पास ले जाता है। इसलिए उसे माता-पिता और परमात्मा से भी बड़ा कहा। जो उसकी सेवा है, वो परम - पुरुष की ही सेवा हुई। इसलिए परम-पुरुष की सेवा करनी है तो सच्चे सद्गुरु की शरण में आकर उनकी सेवा करनी होगी । अब जो भी काल-पुरुष की भक्ति कर रहा है, वो तो परम- पुरुष का अपराधी ही हुआ न, जो उनकी सेवा नहीं करता। पर जो काल-पुरुष की भक्ति देकर परम-पुरुष के सब जीवों को काल के चंगुल से छूटने नहीं दे रहा है, उन्हें अधिक-से-अधिक उलझा रहा है, वो तो परम-पुरुष का महाअपराधी है। ख़ैर, दुनिया को उस परम-पुरुष की ख़बर नहीं है, पर जो भेद को जानकर भी, परम-पुरुष (अपने सच्चे पिता) का भेद जानकर भी एक गुरु को छोड़कर दूसरे के पास नहीं जाना है, झूठे गुरु को छोड़कर सच्चे गुरु के पास नहीं जाना है, काल- पुरुष की भक्ति देने वाले को छोड़कर परम-पुरुष की भक्ति देने वाले के पास नहीं जाना है वाली बात कर रहा है, वो कैसी बात कर रहा है ! वो परम पुरुष का अपराधी हुआ कि नहीं ! जैसे छोटे-पन से किसी को उसके माता-पिता से कोई चुराकर ले जाए। वो अपने माता-पिता को न जान पाए और चुराकर ले जाने वाले गुण्डे को ही अपना पिता मानने लगे तो कोई अपराध नहीं है । उसे पता नहीं है । पर गुण्डा उससे अपना स्वार्थ ही तो सिद्ध करेगा, उससे बंधुआ मजदूर की तरह काम लेकर साथ में डण्डे भी मारेगा। उसके दिल में भी आयेगा कि कैसा बाप है, जो इतना कष्ट दे रहा है ! ऐसे ही इस संसार में मिल रहे अपार कष्टों को देखकर कुछ के दिल में विचार उठता है कि इतना कष्ट देने वाला परमात्मा नहीं हो सकता है। पर उसे समझाने वाला कोई न मिले तो वो नहीं समझ पाता है। यदि ऊपर से कोई उस गुण्डे का ही चेला मिल जाए, जो उसे भ्रमित करता रहे कि यही तेरा बाप है तो वो पूरा भ्रमित हो जायेगा, उसे लगेगा कि शायद कष्ट देने वाला ही उसका पिता है। ऐसे ही संसार में काल - पुरुष की भक्ति