करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 54, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंरहने देना है। इसी गुप्त नाम से संसार के जीव पार होंगे। जिसके घट में यह नाम आयेगा, वो हंस सत्य-लोक में पहुँच जायेगा । मूल नाम पा लेने पर काल के सारे जाल कट जायेंगे। मैं युग-युग इस संसार में आता हूँ और मूल नाम की डोरी से हंसों को सत्य-लोक ले जाता हूँ । इस नाम से हंस के करोड़ों कर्मों का जाल भी कट जाता है । चाहे कोई कितना भी ज्ञान प्राप्त कर ले, ज्ञान की बातें कर ले, पर मूल नाम के बिना मुक्ति हो ही नहीं सकती है। यह नाम कहने में नहीं आता है। जो इस नाम को पा लेता है, वो संसार - सागर से पार हो जाता है। यह नाम करता क्या है ? यह नाम आया कहाँ से ? इन बातों को जानने से पहले देखते हैं कि नाम से पहले आप क्या हैं । नाम से पहले वर्तमान में आप क्या है वर्तमान में आप मन की दुनिया में पूरी तरह से डूबे हुए हैं। आपका मन और आत्मा दूध-पानी की तरह एक हो गये हैं । इसलिए आत्मा का वजूद नज़र नहीं आ रहा है । मन आपकी आत्मा पर हावी हो गया है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि आपको पाप-पुण्य का ठीक-ठीक ज्ञान नहीं हो पा रहा है सही ग़लत का आपको पता नहीं चल पा रहा है। जैसा-जैसा मन कहे जा रहा है, वैसा-वैसा आप किये जा रहे हैं । चाहे अनचाहे आपको वो सब करना पड़ रहा है। यह मन कभी अच्छा भी मन जाता है और कभी बहुत बुरा भी। अच्छे-बुरे दोनों कर्मों का प्रेरक मन है । यही कारण है कि वर्तमान में आप मन की चालाकी को समझ नहीं पा रहे हैं । यही बन आपसे अनिष्टकारी काम भी करवा रहा है। छल, कपट, ठगी, बेइमानी आदि सब कुछ आपसे करवा रहा है। वर्तमान में आम आदमी की सुरति कुंद है। जब हीरा मिट्टी में होता है तो वो रोशनी नहीं दे पाता है, लेकिन जब उसे निकाल साफ़ किया जाता है तो वो हीरा रोशनी देने लगता है। हीरे की रोशनी कम नहीं होती, केवल मात्र आच्छादित हो जाती है । इसी तरह हमारी सुरति अपने-आप में परिपूर्ण है। वो घटती-बढ़ती नहीं। उसकी रोशनी, उसका गुण, उसकी ताक़त कम नहीं हो