करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसकती। इसलिए उसे किसी शक्ति की ज़रूरत नहीं है, पर उसमें मन - माया की गंध लग गयी है, जिसके कारण से उसका प्रकाश लुप्त हो गया है, उसका गुण छिप गया है। कभी-कभी कुछ लोग कहते हैं कि भक्ति करेंगे तो उससे आत्मा को शक्ति मिलेगी । नहीं ! नहीं! ऐसी बात नहीं है । यदि आत्मा को किसी चीज़ से ताक़त की ज़रूरत है तो फिर वो चीज़ आत्मा से बड़ी हो जायेगी। पर नहीं, आत्मा से बड़ी कोई चीज़ नहीं है । यह तो ईश्वर की अंश है । इसे किसी बाहरी पदार्थ की ज़रूरत नहीं है । फिर यदि ऐसा है तो भक्ति क्यों करनी है ? ध्यान क्यों करना है ? आओ, इस ओर चलते हैं । भक्ति से, ध्यान से आत्मा को शक्ति नहीं मिलेगी, पर आत्मा के ऊपर जो मन-माया का कीचड़ लगा हुआ है, वो धुलता जायेगा और आत्मा अपने को अनुभव करने लग जायेगी। जब आत्मा अपने को जान जायेगी तो फिर यह मन की किसी बात को नहीं मानेगी। अभी तो आपकी आत्मा मन के कहने पर चल रही है। जो-जो मन कह रहा है, वो वो करती जा रही है। सारे गंदे काम जो मनुष्य कर रहा है, क्या वो आत्मा करना चाह रही है ? नहीं! मन ही तो सारे गंदे कामों की प्रेरणा दे रहा है। आत्मा अपने को अनुभव नहीं कर पा रही है। मन 24 घंटे आत्मा पर सवार रहता है; सोचने भी नहीं दे रहा है कि क्या बात है । मन की ताक़त से आत्मा भूलवश अपने को शरीर मान बैठी है और मन की इच्छाओं की पूर्ति में जुट गयी है। इस शरीर में बहुत झंझट हैं । काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार रूपी बड़े-बड़े भयंकर राक्षस बैठे हुए हैं, जो बरबस आत्मा को नरक की ओर घसीट रहे हैं । आत्मा असहाय हो गयी है।
जीव पड़ा बहु लूट में नहीं कछु लेन न देन ।।
बड़ी लूट में है। सबसे पहले वर्तमान में हमारे धर्म में भक्ति का जो स्वरूप है, क्या इसमें कोई ग़लती आ गयी है ? अगर सुधार क्यों न करें ! वर्तमान में हमारी भक्ति में दोष तो नहीं आ गया है ! यह गंभीर विषय है। थोड़ा समय पहले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के विषय पर लोगों से राय माँगी गयी। रेडियो, टी. बी. आदि पर आम आदमी की राय माँगी जाती है ।