करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहैं तो कीड़ा नहीं लगता है । क्योंकि जैसे ही खाता है, कीड़ा मर जाता है। इस तरह गुरु नाम के द्वारा अन्दर से सुरक्षित कर देता है । गुरु माया से सुरक्षित कर देता है, गुरु मन से सुरक्षित कर देता है । माया प्रूफ बना देता है । जैसे वाटर प्रूफ घड़ियाँ बनाई गयी हैं, इस तरह पूरा गुरु माया से सुरक्षित कर देता है । आप खुद नहीं कर सकते हैं। मन से, काम से, क्रोध से, भूत-प्रेतों से, ग्रहों-नक्षत्रों से सुरक्षित कर देता है। इनकी मार से इंसान बच नहीं पाता है । एक महात्मा को मैंने सत्संग करते हुए सुना । उसने जब अपना हाथ ऊपर उठाया तो उसके हाथ में मैंने अंगूठियाँ देखीं, जो ग्रहों वाली थीं । महात्मा ने 3-4 अंगूठियाँ पहनी हुई थीं। वाह, अब वो खुद ग्रहों से डर रहा है, बचता फिर रहा है तो शिष्यों की सुरक्षा क्या करेगा। जब महात्मा लोग कहते हैं कि यह करो, वो करो, तप करो, मंत्र जाप करो तो मैं जान जाता हूँ कि इनको मन से बचने का फार्मूला पता नहीं है, क्योंकि—— कितने तपसी तप कर डारे, काया डारी गारा ।
गृह छोड़ भये सन्यासी, तऊ न पावत पारा।।
नाम के बिना मन से कोई पार नहीं पा सकता है। नाम पूरी सुरक्षा कर देता है। सतगुरु शब्द सहाई ।
निकट गये तन रोग न व्यापै, पाप ताप मिट जाई ।।
नाम की ताकत से शरीर के रोग नहीं सतायेंगे, पाप कर्मों की ओर नहीं जा पाओगे। भौतिक, दैहिक और दैविक - तीनों तरह के ताप भी नष्ट हो जायेंगे। ग्रह भी नहीं लगेंगे। जबहि नाम हिरदे भया, भया पाप का नाश ।
जैसे चिनगी आग की, परी पुरानी घास ।।
जैसे पुरानी सूखी घास पर आग की चिंगारी भी पड़ जाए तो अनेक घास के तिनकों को जलाकर भस्म कर देती है, इसी तरह जिस हृदय में नाम आ जाता है, उस हृदय में फिर पाप कर्मों की जगह नहीं रहती । इन बातों में सार है। क्या सच में जब नाम हृदय में आ जाता है तो पाप का नाश हो जाता है ? हाँ, नाम के बाद गलत कर्मों की ओर नहीं जा पाता है । I