करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंतन में आई कियो परवेशा । छाड़ो ज्ञान हमारो देशा ॥
जो तुम निश्चय जीतो कामा । तो अब मोसों करो संग्रामा ॥
यह सुनकर क्रोध आता है और कहता है कि हे ज्ञान, हमारा देश छोड़ दो। अगर तुमने काम को जीत लिया है तो अब मुझसे युद्ध करके बताओ। हम राक्षसों की कहानियाँ सुनाते हैं अपने बच्चों को कि कितने क्रूर थे, भयानक थे। भाइयो, ये सबसे बड़े राक्षस हैं, जो आपके अन्दर में निवास कर रहे हैं। ...तो क्रोध की बात सुनकर ज्ञान अचंभित हो जाता है और जाकर विवेक राजा को यह बात बताता है। तब राजा मंत्री से पूछता है कि क्रोध को किस तरह से मारा जाए ?
तब राजा मंत्रिन सो कहै । प्रबल क्रोध केहि कारण दहै ॥
तब सबहि मिलि मंत्र विचारा । यह तो जाय क्षमा ते मारा॥
बोलि विवेक क्षमा सो कहै । तुम तो जाई क्रोध रन बहै ॥
भक्ति ज्ञान तेहि देइ सहाई । प्रबल क्रोध को मारो जाई ॥
यहि सुनि क्षमा रोपे रन आयी । लीन्हो शील जो धनुष चढ़ायी ॥
तब सब मिलकर विचार करते हैं कि यह तो क्षमा से मारा जाएगा । फिर विवेक क्षमा से कहता है कि तुम जाकर क्रोध को मारो, तुम्हारे साथ भक्ति और ज्ञान भी होंगे। यह सुन क्षमा युद्ध के मैदान में शील रूपी धनुष लेकर आती है।
देखि क्षमा क्रोध चले धायी। मनसा भूमि रोप्यो रन आयी ॥
मारन क्रोध उठे जब धायी । इतने क्षमा दीन्ह मुसकायी ॥
क्रोध आन तब गारी गयी । सुनि क्षमा अनबोली भयी ॥
मीठे वचन क्षमा अति बोलै । कोपै क्रोध पवन ज्यों डोले ॥
क्षमा से अगिन शीतल है जाई । जैसे जल में अग्नि बुझाई ॥
यहि विधि क्रोध क्षमा से भिरई । मानहु अंगार पानी महँ परई ॥
जैसे ही क्रोध मारने को भागता है, क्षमा मुस्करा देती है । क्रोध तब गाली बकता है, पर क्षमा चुप रहती है । फिर क्षमा मीठे वचन बोलती है, जिससे क्रोध की अग्नि वैसे ही शांत हो जाती है, जैसे जल में पड़कर अग्नि । इस तरह क्रोध और क्षमा की लड़ाई ऐसे लगती है मानो अँगार पानी में पड़ गया हो।