करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 94, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंजा रहे थे। धर्मदास ने कहा कि काल - पुरुष में जान है; सबको भ्रमित कर दिया; मुझसे कैसे होगा ? लोगों को भक्ति में कैसे जोडूंगा? साहिब ने कहा कि चिंता मत कर ।
पुरुष शक्ति जब आन समाई । तब नहीं रोके काल कसाई ॥
कहा कि जब परम-पुरुष की ताक़त आकर समायेगी तो काल कुछ नहीं कर पायेगा। जिस दिन नाम मिलता है उस दिन परम - पुरुष की ताक़त आकर समाती है। तब काल का ज़ोर नहीं चलता है । आप इन बातों पर मनन करें। इनमें से कितनी बातें आपके साथ में हो रही हैं। यह आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता है । आपके साथ में एक ताक़त है, यह मेरी वाणी से अधिक आप स्वयं जान सकते हैं। मुझे आपको कुछ समझाने की ज़रूरत ही नहीं है । मेरी वाइब्रेशन ही आपको समझा देगी। सत्संग में बैठकर उलटी गिनती गिनूँगा तो भी समझ आ जायेगी और आप कभी बोर भी नहीं होंगे। वाणी से समझाना तो एक बहाना है । रावण का दिल बदला ही नहीं। राम जी थे । दुर्योधन का दिल बदला ही नहीं। कृष्ण जी थे । पर साहिब कह रहे हैं- सतगुरु मोर रंगरेज, चुनरि मोरी
रंग डारी ॥
यह काम बड़ा मुश्किल है । इस पंथ में आने में रुकावटे हैं कुछ । निरंजन रुकावटें डालता है । मेरे लिए लोग जो-जो भी कह रहे हैं, अच्छा ही कह रहे हैं, ठीक ही कह रहे हैं। केवल अपनी शैली बदल रहे हैं। मैं सब चीज़ सकारात्मक लेता हूँ। मैं नकारात्मक में जाता ही नहीं हूँ । कुछ लोग कह रहे हैं कि इसके पास हिप्नोटिज्म है। इससे उच्चाटन किया जाता है। सही तो कह रहे हैं। जो वस्तु मेरे पास है, वो किसी के पास नहीं है। पर वो हिप्नोटिज्म कह रहे हैं । संतों के शरीर से अध्यात्म किरणें निकलती हैं; वो जगाती हैं । तो उन्हें यह हिप्नोटिज्म लग रहा है । फिर दूसरा कह रहे हैं कि धर्म बदल देता है । यह भी सही है। दुनिया निरंजन के धर्म का पालन कर रही है, मैं परम-पुरुष के धर्म की ओर ले चल रहा हूँ। मैं कुछ भी नकारात्मक नहीं ले रहा हूँ। मैं उनकी बातों को ठीक-ठीक मान रहा हूँ। तो आपका बदलाव मामूली नहीं है। आप दुनिया से निराले हैं । आपके खोटे कर्मों को निकाला गया है। अगर गुरु चेले की ग़लती बोलने में