करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 95, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंझिझक रहा है तो समझना कि वो गुरु मर चुका है। मैं उदण्ड नहीं हूँ, पर आप यह नहीं सोचना कि आप ग़लती करें और मैं कुछ न कहूँ। यह नहीं सोचना । गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढ़े खोट । अन्तर हाथ सम्हार दे, बाहर मारै
चोट ॥
आपमें जो बदलाव है, वो मामूली नहीं है । आप दुनिया से निराले हैं। जो काम आपसे नहीं संभलने वाला होता है, उसमें एक ताक़त आकर आपको मदद दे जाती है। वो एहसास करवाती है कि साथ में हूँ । मैंने जो कहा कि ‘जो वस्तु मेरे पास है, वो कहीं नहीं है, ' प्रमाणित करता हूँ। पूर्ण गुरु आपको बदल देता है, दिव्य-दृष्टि खोल देता है । 10वाँ द्वार खुलता है तो चाँद, तारे आदि नज़र आते हैं, पर जब 11वाँ द्वार खुलता है तो मन नज़र आता है। वो दिव्य-दृष्टि खुलेगी तो काम, क्रोध दिखेगा । अन्यथा कितनी भी तपस्या करना, यह मन काबू में नहीं आयेगा, यह समझ नहीं आयेगा । कपिल मुनि, पाराशर ऋषि आदि ने कम तप नहीं किया था । पर नहीं हो सका मन काबू में । इसलिए—
नाम होय तो माथ नमावे। ना तो यह मन बाँध नचावे ॥
जब पूर्ण गुरु एक ताक़त रोपित कर देता है तो अन्दर का पूरा खेल दिखने लगता है, अपने अन्दर के शत्रुओं को साधक समझने लगता है, मन समझ में आ जाता है । मैंने बार-बार कहा है कि 'जो वस्तु मेरे पास है वो कहीं नहीं है'। यह सुन एक ने मुझसे कहा कि जो आप कहते हैं कि जो पॉवर मेरे पास है, किसी के पास नहीं, इसे प्रमाणित करो। मैंने उससे कहा कि मैं पॉवर नहीं बोल रहा हूँ, वस्तु बोल रहा हूँ । शब्दों की तरफ ध्यान दो । जैसे कोई दुकानदार कहता है कि जो मिर्ची मेरे पास है, कहीं नहीं मिल सकती। वो कहता है कि यह फलानी - फलानी जगह से आई है । ... तो मैं जिस 'वस्तु ं की बात कर रहा हूँ, वो भी इस संसार की नहीं है, तीन लोक में कहीं नहीं है। वो चौथे लोक की वस्तु है। जब वो वस्तु मिलती है तो तीन चीज़ें आ जाती हैं। मैंने अपनी इस चीज़ का अनुभव एक-दो पर नहीं, बल्कि लाखों