करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलोगों पर किया है । इसलिए इसमें कोई संशय नहीं है, पक्की बात है । तीन चीजें शर्तिया होती हैं। जिसे भी मैं नाम देता हूँ, तीन चीज़ें पक्का हो जाती हैं— 1. आत्मा और मन अलग हो जाते हैं। 2. संसार का आकर्षण समाप्त हो जाता है । 3. एक पूर्ण सुरक्षा मिल जाती है। असर सामने है। मेरा हर नामी नाम पाकर बदल जाता है। हर इंसान मन तरंग में नाच रहा है । मन प्रबल है । पर मेरे नामी के साथ अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। नाम पाने के बाद मेरा हर नामी चेतन हो जाता है । अन्य पंथों के लोगों के साथ मेरे नामी की तुलना की जाए तो उनका अपने ऊपर कोई होल्ड नहीं मिलता है, कोई आध्यात्मिकता नहीं मिलती है। मेरे नामी अपने को सबसे अलग पाते हैं, उन्हें अपने अन्य साथी बेवकूफ़ लगते हैं, उनकी हरकतें पागलों वाली लगती हैं, क्योंकि उनके मूड का कोई पता नहीं होता कि कब अच्छे बन जाएँ और कब गंदे | कब मूड खराब हो जाए, कोई पता नहीं । यानी मन पर कोई होल्ड नहीं होता, इसलिए पागल लगते हैं । मेरे नामी का मन पर होल्ड होता है, क्योंकि नाम के साथ मैं मन से उसकी आत्मा का बिलगीकरण कर देता हूँ, दोनों को अलग कर देता हूँ, जिससे मन समझ में आने लगता है। यह काम दुनिया में सबसे कठिन है, जो कोई नहीं कर सकता है। जब मन समझ आने लग जाता है तो दुनिया फीकी लगने लग जाती है, उसका आकर्षण समाप्त होने लग जाता है । फिर तीसरा हर नामी को लगता है कि उसके साथ में एक सबल संरक्षक है, हरेक को वो संरक्षक अनुभव होता है । सच है, यह जो वस्तु मेरे पास है, किसी के पास नहीं है। इस वस्तु से मन की दुनिया समाप्त होती जाती है और आत्मा का रूप समझ आने लग जाता है I ध्यान क्यों किया जा रहा है ? यह जानने के लिए कि मैं क्या हूँ ? गुरु आत्मा और मन को अलग कर देता है । किसी कीमत पर यह काम अपनी ताकत से नहीं हो सकता है । मन ने ऐसे उलझा दिया है कि आत्मा कुछ समझ नहीं पा रही है। मन कहता है कि रोटी खानी है तो आत्मा कहती है कि यही मेरी इच्छा है। इस तरह मन ने आत्मा को अपने पीछे लगा रखा है। आत्मा सभी इच्छाओं में, कल्पनाओं में घूम रही है। जितने भी कर्म मनुष्य कर रहा है,