काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished828 पृष्ठ
पृष्ठ 263, कुल 828 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 263
२५६ ॥ काशिका ॥ ४ । १ ॥ तिः॥ क्रुञ्चा। उष्णहा। देवविशा। हलन्ताः। ज्येष्ठा। कनिष्ठा। मध्यमा। पुंयोगः। कोकिला जातिः॥ मूलान्नञः॥ अमूला॥ ऋन्नेभ्यो ङीप् ॥ ५ ॥ ऋकारान्तेभ्यो नकारान्तेभ्यश्च प्रातिपदिकेभ्यः स्त्रियां ङीप् प्रत्ययो भवति। ङकारः सामान्यग्रहणार्थः। पकारः सामान्यग्रहणविघातार्थः कर्त्री। हर्त्री। दण्डिनी। छत्रिणी॥ उगितश्च ॥ ६ ॥ उग् इहान्न संभवति यथाकथंचित् तदुगिच्छब्दरूपं, तदन्तात् स्त्रियां ङीप् प्रत्ययो भवति। भवती। अतिभवती। पचन्ती। यजन्ती॥ धातोरुगितः प्रतिषेधो वक्तव्यः॥ * ॥ उखास्रत्। पर्णध्वत् ब्राह्मणी॥ अञ्चतेश्चोपसंख्या- नम् ॥ * ॥ प्राची। प्रतीची। उदीची॥ वनो र च ॥ ७ ॥ वबन्ता