भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

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कृष्ण मृगे॥ चिकीर्षत्। चोर। शुक। योध।" Wait, look at the symbols between words in L26: "श्रोत्र शरीरे॥ श्रौत्रम्। जुह्वत्॥ कृष्ण मृगे॥ चिकीर्षत्। चोर। शुक। योध।" Wait, after 'जुह्वत्' there is '॥' (double danda). After 'कृष्ण मृगे' there is '॥'. After 'श्रोत्र शरीरे' there is '॥'.

Now L27: "वर्चस्‡। धूर्त्त। वस्। एत्। मरुत्। क्रुङ्। राज्ञ। सत्त्वन्तु। दशार्ह। वयस्।" Wait:

  1. वर्चस्‡ (with dagger/double cross ‡)
  2. धूर्त्त।
  3. वस्।
  4. एत्।
  5. मरुत्।
  6. क्रुङ्। (kruṅ)
  7. राज्ञ। (rājña)
  8. सत्त्वन्तु। (sattvantu)
  9. दशार्ह। (daśārha)
  10. वयस्। (vayas)

Now L28: "आतुर§। रक्षस्। पिशाच। अशनि। कार्षापण। देवता। बन्धु॥" Wait, "आतुर§": section sign § after आतुर. Then: रक्षस्। पिशाच। अशनि।