काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 668, कुल 828 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुदन्तमुतां च वृङ्वृञौ श्विडीङ्विण्व्ययशीङ्ङिञावपि।
... उदन्तमुतां च रुस्रुवौ क्षुवन्तयोश्चौतिमथो युणुक्ष्णुवः॥"
Wait!
"श्विडीङ्विण्व्ययशीङ्ङिञावपि"
What are the udanta ones?
"उदन्त" - roots ending in उ:
Look at line 25:
गवस्त्यमूदन्तमुतां च?
Wait, look at line 31:
गवस्त्य-
Wait, why is it गवस्त्य?
Wait! Could it be गु, अव, स्त्य...?
No, look at root गु -> गुण is गव? No, गविता!
Look at root गव? No!
Wait, could it be यु, रु, स्नु, क्ष्णु...?
Wait, what if the letters in line 25 are:
...मूदन्त... -> ऊदन्त!
Ah! Look at line 24: ऋदन्तमुदन्तमुतां च
Line 25: ...मूदन्तमुतां च -> ऊदन्त!
Wait, what is before मूदन्त?
...स्त्य?
Could it be `...