भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

पृष्ठ 764, कुल 828 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 764

ण्वती"! Line 19: "चर्मण्वतीति" is spelled "चर्म्मण्वतीति"! Line 20: "चर्मण्वती" is spelled "चर्म्मण्वती"! Line 21: "चर्म्मवतीत्येवान्यत्र ॥"! Let's check if the double 'm' is used consistently. In line 6: च र्म्म ण्व ती -> चर्म्मण्वती! In line 7: च र्म्म ण्व ती -> चर्म्मण्वती! Line 19: च र्म्म ण्व ती ति -> चर्म्मण्वतीति! Line 19: च र्म्म णो -> चर्म्मणो! Line 20: च र्म्म ण्व ती -> चर्म्मण्वती! Line 21: च र्म्म व ती त्ये वा न्य त्र -> चर्म्मवतीत्येवान्यत्र ॥! Yes! 'र्म्म' is used everywhere for 'र्म'. We should preserve चर्म्म... or चर्म...? Pure transcription usually preserves the exact ligature/spelling: चर्म्मण्वती, चर्म्मवतीत्येवान्यत्र, etc.

Let's check other words with doubling after repha: Line 15: हविर्द्धानानि (havirddhānāni) - yes! Line 16, 24: ऋषिः - no repha doubling. Line 2: विद्युत्त्वान्वला