भारतकोश
काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

Kashyapa Samhita Hindi

महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा

स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished942 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

उपोद्घात का हिन्दी अनुवाद

२०९

काश

दीर्घतपा

धन्व

धन्वन्तरि

केतुमान्

भीमरथ (भीमसेन)

दिवोदास

प्रतर्दन

वत्स

अलर्क

काश के पौत्र धन्व नामवाले राजा ने समुद्रमन्थन से उत्पन्न अब्ज नामक देवता की आराधना करके अब्ज (कमल) के अवतार रूप धन्वन्तरि नामक पुत्र को प्राप्त किया। उस धन्वन्तरि ने भारद्वाज से आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करके उसे आठ भागों में विभक्त करके शिष्यों को उपदेश दिया। इसके प्रपौत्र दिवोदास ने वाराणसी¹ नगरी की स्थापना की। दिवोदास का पुत्र प्रतर्दन था। दिवोदास के समय शून्य हुई वाराणसी को प्रतर्दन के पौत्र काशीराज अलर्क ने पुनः बसाया, ऐसा हरिवंशपुराण से प्रतीत होता है। हरिवंश के अनुसार शून्य हुई वाराणसी का दिवोदास द्वारा पुनः बसाये जाने से वाराणसी की उससे पूर्व भी विद्यमानता प्रकट होने पर भी महाभारत² के अनुशासन पर्व में दिवोदास द्वारा ही वाराणसी के निर्माण का निर्देश है।

महाभारत में भी चार³ स्थानों पर दिवोदास का नाम आता है। महाभारत में भी दिवोदास का काशीपति⁴ होना, वाराणसी की स्थापना, हैहयों द्वारा पराजित होकर भरद्वाज की शरण में जाना, उसके द्वारा किये हुए पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रतर्दन नामक वीर पुत्र की उत्पत्ति आदि मिलते जुलते विषय ही मिलते हैं। इसमें दिवोदास के पूर्वपुरुषों में अन्य व्यक्तियों के साथ केवल हर्यश्व आदि प्रसिद्ध व्यक्तियों के ही नाम दिये हैं। अग्निपुराण (अ. २७८) तथा गरुडपुराण (अ. १३९ श्लोक ८-११) में भी वैद्य धन्वन्तरि की चतुर्थ सन्तति (पीढ़ी) में दिवोदास का नाम दिया है।

महाभारत⁵ के समुद्र मन्थन प्रकरण में धन्वन्तरि देव के आविर्भाव का वर्णन मिलता है। पुराण आदि में भी धन्वन्तरि का निर्देश है। आग्नेय⁶ पुराण में समुद्रमन्थन से उत्पन्न धन्वन्तरि का आयुर्वेद के प्रवर्तक के रूप में निर्देश किया गया है। परन्तु वेद में धन्वन्तरि का उल्लेख न होने से तथा हरिवंश पुराण में समुद्र मन्थन से आविर्भूत अब्ज देवता का धन्व राजा के पुत्र रूप में उत्पन्न होने के कारण यौगिक धन्वन्तरि नाम होने से दोनों की सङ्गति करने पर अब्ज के ही धन्वन्तरि होने से दोनों में अभेद मानकर समुद्र से उत्पत्ति के प्रसङ्ग में अब्ज देवता को भी भावी धन्वन्तरि नाम


१. इस प्रकार वारणार नामक किसी व्यक्ति ने वाराणसी को बनाया-यह प्रवाद निर्मूल है। (हिन्दी विश्वकोश-काशी शब्द देखें)।
२. २ से ६ तक की टि. उपो. संस्कृत पृ. ४० देखें।