भारतकोश
काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

Kashyapa Samhita Hindi

महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा

स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished942 पृष्ठ

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२७८ | काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्

तथा सौवीर का प्रदेश और उसके समीप का इरान, बेबिलोनिया तथा असीरिया आदि का प्रदेश ही आर्यों का प्रथम उद्गम स्थान था। अस्तु, यह प्रथम उद्गम स्थान कोई भी हो किन्तु समस्त प्राचीन जातियों की प्राचीन भाषाओं के साथ ऋग्वेद की भाषा की समानता होने से भाषा शास्त्र की दृष्टि से भी विद्वानों की यह सम्मति है कि अत्यन्त प्राचीन काल में एक ही मूल वृक्ष की चारों ओर फैली हुई ये शाखा-प्रशाखायें हैं।

प्राचीन पाश्चात्त्य जातियों तथा भारतीय जाति में केवल भाषा की ही समानता नहीं है अपितु अन्य सभ्यता आदि भी समान हैं। इससे प्रतीत होता है कि प्राचीन परिस्थिति में विद्यमान एक ही सभ्यता प्राचीन पाश्चात्त्य जाति तथा भारतीय जाति में समानरूप से फैल गई इसीलिये उनमें न्यूनाधिक समानता मिलती है। अथवा यह भी संभव है कि वैदिक आर्यसभ्यता ही चारों ओर फैलती हुई प्राचीन पाश्चात्त्य जातियों में भी पहुंच गई हो तथा उसी की हमें झलक मिलती हो।

बेबिलोनिया देश के कसाइटिस¹ (Kassites ई. पू. १७६०) वंश के राजकुमारों के नामों में सूर्य, इन्द्र तथा मरुत् शब्दों के मिलने से, पश्चिम एशिया के कैपोडोसिया (Cappadocia) नामक स्थान में हिताइटी² (Hittites) तथा मित्तानी (Mittani) नामक जातियों के परस्पर संघर्ष के बाद के (B. C. 1360) सन्धि शिलालेख तथा उनके विवाह के समय साक्षीरूप से मित्र, वरुण, इन्द्र तथा नासत्य आदि के उल्लेख से, बोगस³ क्वाय (Boghaz keui ई. पू. १४००) के शिलालेख में संख्यावाचक⁴ आदि शब्दों के मिलने से तथा सीरिया और पैलेस्टाइन⁵ (फिलस्तीन) के राजाओं के नाम आर्य राजाओं के नामों के समान होने से वैदिक सभ्यता का प्राचीन समय में भी इतनी दूर प्रचार⁷⁻¹ होना स्पष्ट है।

सुमेरियन प्रदेश तथा भारत के प्राचीन राजाओं में साधारण वर्णापभ्रंश के अतिरिक्त विशेष समानता⁶ मिलती है। उनके मनस्⁷⁻² नामक आदि व्यवस्थापक तथा भारतीय ग्रन्थोक्त मनु के नाम तथा कार्य में समानता मिलती है तथा वहां


लघु एशिया (एशिया माइनर) में आर्यों की उपस्थिति के प्रमाण

१. कसाइटिस् (काशी) लोगों ने बेबिलोनिया में १७६० ई. पूर्व में अपना राज्य स्थापित किया था। इनके राजाओं के नामों में हमें Surias (Surya-सूर्य) Indas (Indra-इन्द्र), Maruttas (Marutah-मरुत्) तथा Bugas (Iranian baga-God) के नाम मिलते हैं। तथा उन्हीं लोगों ने ही उस समय घोड़े का भी प्रथम बार प्रयोग किया था। अर्थात् इन्होंने ही पहले पहल घोड़ों को उपयोग में लाना प्रचलित किया था।

२. Upper Euphrates valley में मित्तानी राजाओं तथा हिताइतो राजाओं द्वारा १३६० ईसवी पूर्व में किये गये सन्धिपत्र में In-da-ra (इन्द्र), U-ru-v-na (वरुण), Mi-i-tra, (मित्र) तथा Na-sa-at-ti-i-ia (नासत्य) आदि आर्य देवताओं के नाम मिलते हैं। तथा कुछ मित्तानी राजाओं के नाम भी Sutarna, Dusratta, Artatama आदि आर्य नाम मिलते हैं।

३. मित्तानियों के बोगस क्वाय शिलालेख में (लगभग १४०० ई. पू.) Aika (एक), Teras (त्रि), Panza (पंच) Satta (सात), Nav (नव) आदि आर्य संख्याएँ मिलती हैं।

४. Cappadocia के हिताइती १६-१५ शताब्दी ई. पू. में संभवतः कोई आर्यन भाषा बोलते थे। तुलना कीजिये- सर्वनाम-कुइस्, कुइत्। क्रिया-एस्मि (अस्ति) वर्तमान (लट्) की विभक्ति इनुमि (नोमि) रूप आदि।

५. Tell-el-Amarna (तेल-अल्-अमर्ना) में मिले हुए प्राचीन लेखों में हमें सीरिया तथा फिलस्तीन के राजाओं के नाम भी आर्य नामों के समान मिलते हैं। उदाहरण के लिये—Biridaswa, Suwardata, yasdata तथा Artamanya आदि।

६. सुमेरियन प्रदेश के प्राचीन उक्कुसि, वक्कुस, निमिरुद, पुन पुन, नक्ष अनेन, .... शगुर, मनिशमंज, नरम अंश, दलीप इत्यादि राजाओं की क्रमशः इक्ष्वाकु, विकुक्षि, निमि, पुरञ्जय, अनेना, सगर, असमञ्जस, अंशुमान तथा दिलीप आदि भारतीय राजाओं से बहुत समानता मिलती है (सरस्वती मासिक पत्रिका १९३७ अप्रैल अङ्क)

७. १-२ की टि. उपो. संस्कृत पृ. १०१ देखें।